Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
एमपी बोर्ड 10वीं-12वीं परीक्षा 2027 की तारीखें घोषित: 17 फरवरी से 12वीं और 24 फरवरी से 10वीं के एग्ज... जबलपुर रेल मंडल का टिकट चेकिंग दस्ता फुल एक्शन मोड में, 4 महीने में वसूला 28 करोड़ का रिकॉर्ड जुर्मा... लखनऊ में सनसनीखेज वारदात: जानकीपुरम में पत्नी ने लोहे के तवे से वार कर ली पति की जान, 5 साल से चल रह... महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं में 2 साल के भीतर 584 छात्रों की मौत, सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे... भारी विरोध के बाद झुकी बार काउंसिल ऑफ इंडिया: NALSAR छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक का आदेश BCI ने लिया... अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में 15 अगस्त से लागू होगा नया ड्रेस कोड, एकरूप वेशभूषा में दिखेंगे पु... राजस्थान कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला, UCC और 'ट्री राजस्थान प्रोटेक्शन एक्ट' को मिली हरी झंडी लखनऊ के रहीमाबाद में रिश्तों और इंसानियत का कत्ल, जमीन के लालच में मृत पिता के शव का सादे कागज पर लग... कुर्ला लैंडस्लाइड हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हुई, GSI की 8 साल पुरानी चेतावनी आई सामने अंबाला कैंट NH-44 पर भारी बवाल: प्रदर्शनकारियों के पथराव में DSP समेत 7 पुलिसकर्मी घायल, लाठीचार्ज औ...

नमाज और फिर भोलेनाथ की आरती, लखनऊ के ‘शिव वाटिका’ में हुआ रोजा इफ्तार

34

एक तरफ गंगा जमुनी तहजीब को लेकर यूपी में राजनीति गर्म नजर आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे उदहारण भी देखने को मिल रहे हैं, जो इस राजनीति को चुनौती देने का काम कर रहे हैं. मंगलवार को एक कॉलोनी में भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली. कॉलोनी वासियों द्वारा बनवाई गई शिव वाटिका में रोजा इफ्तार हुआ. जमात के साथ नमाज हुई और उसके बाद उसी परिसर में भगवान भोलेनाथ की आरती का कार्यक्रम संपन्न हुआ.

लखनऊ के गुडंबा क्षेत्र में स्थित अवधपुरम कॉलोनी में रविवार शाम बाबा अवधेश्वर नाथ मंदिर के सामने के प्रांगण शिव वाटिका में रोजा इफ्तार का भव्य आयोजन किया गया. इस दौरान रोजेदारों के लिए नमाज पढ़ने का भी इंतजाम किया गया. जमात के साथ नमाज संपन्न होने के बाद रोज शाम को होने वाली बाबा भोलेनाथ की आरती का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ, जिसमें मुस्लिम समाज के लोगों ने भी हाजिरी दी.

आपसी भाईचारे का पेश किया नमूना

रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था अवधपुरम वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राजेश तिवारी ने बताया कि सोसाइटी ने कॉलोनी में बने शिव वाटिका पार्क में रविवार शाम रोजा इफ्तार का आयोजन किया. इसमें कॉलोनी के अनेक हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने हिस्सा लेकर आपसी भाईचारे का शानदार नमूना पेश किया.

साथ ही उन्होंने बताया कि इसी प्रांगण में मगरिब की नमाज पढ़ने का इंतजाम भी किया गया था और इफ्तार के बाद मुस्लिम भाइयों ने जमात के साथ नमाज भी अदा की. राजेश तिवारी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम सनातन धर्म के मूल मंत्रों में शामिल है और हर धर्म की आस्था को सम्मान देना हमेशा से भारतीय संस्कृति की पहचान रही है. उन्होंने बताया कि अवधपुरम कॉलोनी अवध की संस्कृति को आत्मसात करती है. यहां स्थित शिव मंदिर और उसके सामने बने पार्क शिव वाटिका का निर्माण कॉलोनी के निवासियों ने अपने संसाधनों से कराया है.

मंदिर के निर्माण में मुस्लिम समाज का अहम योगदान

राजेश तिवारी ने कहा कि मंदिर के निर्माण में कॉलोनी के मुस्लिम समाज के लोगों ने भी अहम योगदान दिया है और वे इसके निर्माण में आने वाली हर मुश्किल का सामना करने में हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं. शिव वाटिका नाम भी यहां के एक मुस्लिम भाई ने ही दिया है. कॉलोनी के मुस्लिम भाई यहां होने वाले बड़ा मंगल के भंडारे, दशहरा और माता रानी का जागरण जैसे आयोजनों में बढ़-चढकर हिस्सा लेते हैं. यह भाईचारा ही सदियों से हमारे देश की खूबसूरती रहा है.

गंगाजमुनी तहजीब हमेशा दिखती रहेगी

सोसाइटी के सचिव आरिफ अली सिद्दीकी ने कहा कि भगवान शिव के मंदिर के सानिध्य में रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन और उसमें कॉलोनी तथा आसपास के निवासियों का बढ़-चढकर हिस्सा लेना यह दिखाता है कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना. उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिव वाटिका में रोजा इफ्तार का आयोजन कई लोगों को हैरत में डाल सकता है, लेकिन हम सभी को यह याद रखना होगा कि अवधपुरम अवध की गंगा-जमुनी तहजीब को जीता रहा है और आगे भी जीता रहेगा.

सिद्दीकी ने कहा कि शिव वाटिका में रोजा इफ्तार और नमाज के बाद मंदिर में पंडित उमेश मिश्रा की अगुवाई में रोज की तरह आरती का आयोजन किया गया, जिसमें मुस्लिम समाज के सदस्यों ने भी हाजिरी दी. उन्होंने कहा, यह पूरा घटनाक्रम इस बात का सुकून देता है कि हमारे खून में पैवस्त भाईचारा अब भी उसी रवानी के साथ जिंदा है. सोसाइटी के कार्यकारिणी सदस्य शिवकुमार सिंह ने कहा कि धरती पर आए सभी नर-नारी एक ही परमपिता परमेश्वर की संतान हैं. भले ही उनकी पूजा पद्धति अलग-अलग हो. मानवता की जीत इसी में है कि हम सभी एक-दूसरे की धार्मिक आस्थाओं का आदर करें.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.