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रशियन डेलिगेशन काशी पहुंचा, युद्ध से अशांत यूरेशिया में शांति को लेकर किया रूद्र यज्ञ, बोले-‘हम युद्ध से तंग आ चुके हैं’

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रूस से 35 सदस्यीय एक विशेष दल पहुंचा है. यहां इन्होंने काशी के पंडितों के नेतृत्व में विधि-विधान से भव्य रूद्र यज्ञ किया. यज्ञ का मुख्य उद्देश्य युद्ध से प्रभावित यूरेशिया क्षेत्र और पूरी दुनिया में शांति का संचार करना है. यज्ञ के बाद डेलिगशन ने भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के बाद आरती भी की.

35 सदस्यीय डेलिगेशन में शामिल एक सदस्य ने बताया किमहाशिवरात्रि के अवसर पर महाकुंभ जाकर संगम में डुबकी लगाने की उनकी योजना है. यह दल रूस के विभिन्न शहरों से आया है और काशी, अयोध्या, चित्रकूट और प्रयागराज के धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करने के लिए यात्रा पर है.

क्या बोलीं मास्को की फ्लोरेंटीना?

मास्को की फ्लोरेंटीना का कहना है, “हमने महादेव और अन्य सभी देवताओं को साक्षी मानकर रूद्र यज्ञ किया, ताकि यूरेशिया समेत पूरी दुनिया में शांति हो. हम युद्ध से तंग आ चुके हैं.” अस्सी घाट पर हुए इस यज्ञ में दीपक पुरोहित ने यज्ञ को संपन्न कराया और इस दौरान काशी के वसुधैव कुटुंबकम दर्शन को समझाया. उन्होंने बताया कि यह दल रूस के अस्त-व्यस्त समाज में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से काशी आया है. उनका उद्देश्य “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना से यह यात्रा करना है, ताकि हर व्यक्ति को शांति और सुख की प्राप्ति हो.

26 साल की मारिया कहती हैं, “अब हम थक चुके हैं, बहुत विनाश हो चुका है. हम चाहते हैं कि लोग सद्बुद्धि प्राप्त करें और शांति के मार्ग पर चलें. काशी में हवन और प्रयागराज में डुबकी लगाने का हमारा यही उद्देश्य है.”

तानाशाहों से दुनिया बर्बाद नहीं होनी चाहिए

महाकुंभ में डुबकी लगाने के बाद यह दल काशी के विभिन्न मंदिरों में दर्शन करेगा और फिर अयोध्या और चित्रकूट की ओर प्रस्थान करेगा. इस दल का विश्वास है कि तानाशाहों की सनक से दुनिया बर्बाद नहीं होनी चाहिए, और इसी उद्देश्य से वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर काशी पहुंचे हैं.

महाशिवरात्रि के मौके पर ये 35 लोग महाकुंभ में डुबकी लगाएंगे, ताकि दुनियाभर में शांति का संदेश फैल सके और लोग एकजुट होकर शांति की ओर बढ़ें.

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूती

इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह रूस और भारत के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर बन रहा है. रूस के लोग भारत की संस्कृति, योग और प्राचीन परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं, और यही कारण है कि वे भारत के इस धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र काशी आए हैं.

यह आयोजन काशी की महानता और दिव्यता का प्रतीक है, जहां हर साल लाखों लोग आते हैं, और यहां की धार्मिकता और संस्कृति के कारण काशी को विश्वनाथ की नगरी के रूप में जाना जाता है.

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