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ये हैं छुट्टी नहीं लेने वाले डॉक्टर…18 साल से नहीं लिया अवकाश; कहानी भरत वाजपेई की

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मध्य प्रदेश केइंदौर के जिला अस्पताल में डॉक्टर भरत वाजपेई, जिन्होंने पिछले 18 वर्षों से बिना छुट्टी लिए लगातार काम किया है. इन्होंने न केवल हजारों पोस्टमार्टम किए हैं, बल्कि कई पेचीदा मामलों का खुलासा कर पुलिस को अपराधियों तक पहुंचने में भी मदद की है. यही कारण है कि उन्हें उनके सहकर्मी डॉक्टरों द्वारा ‘छुट्टी नहीं लेने वाले डॉक्टर’ के रूप में जाना जाता है.

डॉक्टर भरत वाजपेई का इंदौर जिला अस्पताल में कार्यकाल लगभग 40 साल पुराना है. इस दौरान उन्होंने 15,000 से अधिक पोस्टमार्टम किए हैं और इस काम के लिए दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से भी सम्मानित हो चुके हैं. उनकी कार्यशैली और निष्ठा ऐसी है कि उनका नाम आज भी हर पोस्टमार्टम विभाग में गूंजता है.

बेटे की शादी थी, अस्पताल में कर रहे थे पोस्टमार्टम

डॉक्टर भरत अपने काम को इस हद तक प्राथमिकता देते हैं कि निजी जीवन की खुशियों को भी काम के आगे छोड़ देते हैं. एक दिलचस्प उदाहरण यह है कि जब उनके बेटे की शादी थी, तो वह पहले पोस्टमार्टम करने के लिए अस्पताल पहुंचे, और शादी में शामिल होने के लिए उसके बाद ही गए. होली और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान भी वह छुट्टी नहीं लेते.

इनकी प्रेरणा का स्रोत मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ है. इस कहानी में जीवन के उतार-चढ़ाव और नैतिकता का महत्व बताया गया है, और डॉक्टर वाजपेई ने भी अपने जीवन में इसे आत्मसात किया है. यही कारण है कि वे निरंतर समाज की सेवा में लगे रहते हैं और लोगों की मदद करने का कोई मौका नहीं छोड़ते.

स्थापित किया आधुनिक पोस्टमार्टम विभाग

इंदौर जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम विभाग का शुरुआत में बहुत छोटा आकार था, और काम करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. लेकिन डॉक्टर वाजपेई ने अपनी मेहनत और वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से एक नया, आधुनिक पोस्टमार्टम विभाग स्थापित किया, जिसमें सभी सुविधाएं हैं.

उन्होंने अस्पताल के पोस्टमार्टम विभाग में कई प्रेरणादायक स्लोगन भी लगाए हैं, जैसे ‘चैतन्य की मदद करते हुए मृत्यु जहां मुदित रहती है’, ताकि दुखी लोग इन स्लोगनों को पढ़कर आत्मबल प्राप्त कर सकें.

मृत व्यक्ति भी बहुत कुछ बता सकता है

डॉक्टर वाजपेई ने कई जटिल पोस्टमार्टम किए हैं, जिनसे पुलिस को न केवल अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिली, बल्कि कई राज भी खोले. उनका मानना है कि मृत शरीर से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं, और यदि पोस्टमार्टम सही तरीके से किया जाए तो मृत व्यक्ति भी बहुत कुछ बता सकता है.

कई ऐसे मामले थे जिनमें पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था, लेकिन डॉक्टर वाजपेई के किए गए पोस्टमार्टम से पुलिस ने सही साक्ष्य पाए और अपराधियों को पकड़ने में सफल रही.

अभिनेता अमिताभ बच्चन के बड़े फैन

जहां एक ओर डॉक्टर भरत एक समर्पित चिकित्सक हैं, वहीं उनकी एक और खासियत है कि वे फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के बड़े फैन हैं. उनका रहन-सहन और हाइट भी अमिताभ बच्चन से मिलती-जुलती है. डॉक्टर वाजपेई अक्सर अमिताभ की फिल्मों के प्रसिद्ध गाने गाते हैं और उन्हें गाने का बहुत शौक है.

जब भी उन्हें मौका मिलता है, वह अस्पताल में अपने सहकर्मियों और मरीजों का मनोरंजन करने के लिए एक से बढ़कर एक गाने गाते हैं. डॉक्टर भरत वाजपेई न केवल एक योग्य और समर्पित चिकित्सक हैं, बल्कि उनकी कार्यशैली और जीवनशैली उन्हें एक आदर्श डॉक्टर बनाती है. उनके योगदान और संघर्ष ने इंदौर जिला अस्पताल को एक नई पहचान दी है और उनके कार्य हमेशा याद किए जाएंगे.

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