Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
India's Fastest Metro: भारत की सबसे तेज मेट्रो की रफ्तार ने चौंकाया, अब घंटों का सफर मात्र 30 मिनट म... India AI Impact Summit 2026: बिहार में तकनीक का नया दौर, राज्य सरकार ने ₹468 करोड़ के MoU पर किए हस्... Mamata Banerjee vs EC: "चुनाव आयोग की हिम्मत कैसे हुई?" सुप्रीम कोर्ट के नियमों के उल्लंघन पर भड़कीं... Delhi Kidnapping: पहले विश्वास जीता, फिर दूध पिलाने के बहाने बच्चा लेकर फरार! दिल्ली के अंबेडकर हॉस्... Rape Case Verdict: दुष्कर्म मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी को 7 साल की कड़ी सजा और ... Bhupinder Hooda on Crime: "हरियाणा में वही सुरक्षित है जिसे कोई मारना नहीं चाहता"—बढ़ते अपराध पर हुड... Haryanvi Singer Harsh Gupta Arrested: हरियाणवी सिंगर हर्ष गुप्ता गिरफ्तार, पुलिस ने इस गंभीर मामले म... High-Tech Fraud: पेमेंट का फर्जी मैसेज दिखाकर लाखों के गहने ले उड़ा ठग, शातिर की तलाश में जुटी पुलिस Rohtak Gangwar: रोहतक में सरेआम गैंगवार, गोगा की 20 से अधिक गोलियां मारकर हत्या, CCTV में कैद हुई खौ... Haryana Vivah Shagun Yojana: हरियाणा में बेटी की शादी के लिए मिलेंगे 71,000 रुपये, जानें क्या है पात...

Cream लगाने वाले हो जाएं Alert, होश उड़ा देने वाला हुआ खुलासा

8

चमड़ी को गोरा करने के लिए इस्तेमाल की जाती क्रीम शरीर के लिए खतरनाक है। यह बड़ा खुलासा PGI के नेफरोलोजी विभाग द्वारा करवाए गए अध्ययन में हुआ है।

हाल ही में पी.जी.आई. नेफरोलोजी विभाग की ओ.पी.डी. में एक मरीज आया, जिसके गुर्दे में समस्या थी। जब डॉक्टर ने Diagnose के लिए हिस्ट्री पूछी तो पता चला कि वह कुछ समय से चमड़ी को गोरा करने के लिए क्रीम का इस्तेमाल कर रहा  था। इस कारण उसके गुर्दों  में पारे की  मात्रा बढ़ रही थी।  इसके साथ उसे परेशानी हो रही थी। इसके बाद मरीज को क्रीम ना लगाने के लिए कहा गया तो शरीर के पारे का स्तर अपने आप कम होने लग पड़ा।पिछले कुछ सालों से चमड़ी को गोरा करने  वाली क्रीम पर चमड़ी की देखभाल के रूप में ग्लूटेथिओन (मानव सेलों में कुदरती तौर पर पाए जाने वाला एक ऐंटआक्सीडैंट ) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

इनमें से कईयों में पारे का स्तर तय सीमा से अधीक होता  है,  जो किडनियों को प्रभावित करता है। पी.जी.आई. नैफरोलोजी विभाग के सहायक प्रोफैसर डॉ.राजा रामचंदरन अनुसार  उन्होंने जो  मरीज देखे  है, जब उनसे क्रीम बारे पूछा  गया  तो उन्हें क्रीम के कोई  ब्रांड लेबल यां नाम  का  कुछ  पता नहीं था। उन्होंने कहा कि  हम चमड़ी को  गोरा करने  वाली क्रीम का इस्तेमाल के बाद  पैशाब  में प्रोटीन  रिसाव वाले नैफरोटिक  सिंडरोम  के  कुछ  मामले देखे है। इन  मरीजों  के  खून में पारे का स्तर बढ़ा हुआ  था। इससे साफ पता  लगता है  कि इन क्रीमों  में पारा था,  जो  चमड़ी के  जरिए  शरीर में दाखिल हो  रहा  था। ऐसे मामले  किसी खास क्षेत्र तक  सीमित नहीं बल्कि दुनिया भर में कई मामले  सामने आए है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.