Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Nomadic Elephant 2026: पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, रूम इंटरवेंशन और बोख कुश... Yogi Adityanath Delhi Visit: पीएम मोदी और जेपी नड्डा से मिले सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी चुनाव और संगठ... सोशल मीडिया पर दिखावा पड़ा भारी: यूट्यूबर मधुमिता के घर से ₹1 करोड़ के सोने-हीरे के जेवर चोरी Delhi Festive Preparations: रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पर्व के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई 3 विशेष समित... वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई बेहद आसान: अब दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति, घर आएंगे BLO मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गरमाई सियासत: राहुल गांधी ने साझा किया जिजी थॉमसन का दावा UKSSSC VPDO Scam: 2016 भर्ती घोटाले में हरीश रावत से ईडी ने किए सवाल-जवाब, कांग्रेस ने बताया बदले की... Sambhal News: आचार्य प्रमोद कृष्णम को बब्बर खालसा से जुड़ी धमकी, विदेशी नंबर से ऑडियो कॉल; गृह मंत्र... Roorkee News Today: रुड़की में दोहरे हत्याकांड से सनसनी, गांव में भारी पुलिस बल तैनात; एसएसपी बोले- ... Election Commission Reforms: चुनाव आयोग में पारदर्शिता की नई पहल, SIR प्रोसेस, ECINet और अधिकारियों ...

एमपी हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, ‘सरकार गुंडागर्दी से किसी की जमीन बिना मुआवजा दिए नहीं हड़प सकती’

61

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ओपन कोर्ट में मौखिक रूप से तल्ख टिप्पणी में कहा कि सरकार गुंडागर्दी से किसी की जमीन बिना मुआवजा नहीं हड़प सकती। इसी के साथ सरकार को आदेश दिए कि याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी शशि पांडे को उसकी जमीन के बदले वर्ष 1988 से अभी तक का मुआवजा 10 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान करें।

कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की उक्त राशि इस दौरान पदस्थ रहे सभी कलेक्टरों से वसूल की जाए। याचिकाकर्ता को यह राशि दो माह के भीतर भुगतान की जाए। न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकलपीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि आदेश का पालन सुनिश्चित कर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रिपोर्ट पेश करें।

बायपास से लगी जमीन ले ली थी

याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी शशि पांडे की ओर से अधिवक्ता आरके संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि राज्य शासन ने पांच फरवरी, 1988 को याचिकाकर्ता की अधारताल बायपास से लगी 29 हजार 150 वर्गफुट जमीन ले ली थी।

इतने वर्षों में मुआवजा भी नहीं दिया गया

इस जमीन के बदले याचिकाकर्ता को मुआवजा नहीं दिया गया और इतने वर्षों में अधिग्रहण की कार्रवाई भी नहीं की गई। इसके पहले भी एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें हाई कोर्ट ने 2006 में याचिकाकर्ता के प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश कलेक्टर को दिए थे। वर्ष 2007 में तत्कालीन कलेक्टर ने आदेश तो पारित किया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने पुन: 2016 में याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.