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1947 से पहले में जन्में गौतम और बिहार की अनारकली हाथी की कहानी

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 उमरिया: बांधवगढ़ के ताला में हाथी महोत्सव चल रहा है। शनिवार से शुरू हुए बांधवगढ़ गज महोत्सव में सात दिनों तक हाथियों की सेवा और सत्कार हो रहा है। सात दिनो तक चलने वाले इस कार्यक्रम में हथियों की विशेष खातिरदारी की जाती है। सोनपुर बिहार के मेले से खरीदकर लाई गई मादा हाथी अनारकली भी अपनी तीन संतानों के साथ मौजूद है।

अपनी संतानों के साथ अनार कली उस समय काफी लाड़ लड़ाती दिखी जब उसे चरणगंगा नदी में स्नान के लिए ले जाया गया। इसके बाद जब अनार कली की संतान सूर्या, गणेश और लक्ष्मी की तेल से मालिश की गई तब भी अनार कली साथ में ही रही। महोत्सव स्थल पर जब अनारकली और उसकी संतानों को लाया गया, तब भी वह अपनी सूंड़ से फल उठाकर अपने बच्चों को पहले खिला रही थी। अनार कली को वर्ष 1978-79 में बिहार से खरीदकर लाया गया था।

अनारकली की तीन संतान

हाथी उत्सव में शामिल पांच ऐसे हाथी भी हैं जिनका जन्म बांधवगढ़ में हुआ है। इन हाथियों में सुंदरगज, अष्टम, बांधवी, सूर्या, पूनम, गणेश और लक्ष्मी शामिल हैं। इनमे से तीन सूर्या, गणेश और लक्ष्मी तो अनारकली की संतानें हैं जबकि अष्टम और बांधवी तूफान की संतानें हैं। तूफान की मौत पिछले साल शुरू में हो गई थी। सुंदरगज तारामती की संतान है।

सबसे बुजुर्ग गौतम हाथी भी शामिल

हाथी बांधवगढ़ नेशनल पार्क की व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग माने जाते हैं। महोत्सव में हिस्सा ले रहे 14 हाथियों मे 9 नर व 5 मादा है। नरों में गौतम 78 सबसे उम्रदराज है, जिसका जन्म आजादी के पहले अर्थात वर्ष 1946 मे हुआ था। इसे 1978 मे कान्हा से लाया गया था, जबकि मादा मे 60 साल की अनारकली सबसे बुजुर्ग है। इसे सोनपुर बिहार के मेले से खरीदा गया था।

अन्य नरों में श्याम 41, रामा 38, सुंदर गज 38, लक्ष्मण 27, अष्टम 22, नील 21, सूर्या 12 और गणेश 9 साल का है। मादाओं में काजल 46, बांधवी 13, पूनम 11 एवं नन्ही लक्ष्मी 6 वर्ष की है।

जंगलों से पकड़े गये थे 5 हाथी

बांधवगढ़ में हाथियों का कुनबा बड़ा करने मे जंगल से पकड़े गये हाथियों का विशेष योगदान है। इनमें से काजल, श्याम, लक्ष्मण व नील को सीधी तथा रामा को अनूपपुर के जंगल से रेस्क्यू कर के लाया गया था। ये सभी हाथी जंगली थे और अपने झुंड से भटकने के बाद जंगल और जंगल से लगे गांवों में आतंक का पर्याय बन गए थे। इन हाथियों की वजह से भारी नुकसान हो रहा था जिसे रोकने के लिए इन्हें बांधवगढ़ की टीम ने रेस्क्यू किया था।

चार दिन और होगी सेवा और सत्कार

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में सात दिनो तक चलने वाले इस गज महोत्सव में हथियों की विशेष खातिरदारी की जायेगी। उन्हे उनका प्रिय भोज गुड़ और गन्ना खिलाया जायेगा। गुड़ और आटे से बने मोटे रोट खिलाए जाएंगे।इसके अलावा केला, सेब सहित दूसरे वे सभी फल भी खाने को दिए जाएंगे जो हाथियों को अतिप्रिय हैं।

महोत्सव के दौरान रोजाना हाथियों को स्नान कराने के बाद तेल मालिश और विशेष श्रृंगार किया जाता है। साथ ही वन्य जीव चिकित्सक उनका सूक्ष्म स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। वहीं आवश्यकतानुसार उनका उपचार भी किया जाता है। महोत्सव का समापन दो सितंबर को होगा

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