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उठो पार्थ, युद्ध करो… युवाओं में हताशा से छुटकारा के लिए मेगा यूथ फेस्ट का आयोजन

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आज युवा कई प्रकार की आदतों के शिकार हो रहे हैं और यही वजह है कि उनके भीतर कई मोर्चे पर हताशा भी देखने को मिलती है. ऐसे युवाओं में लव अफेयर्स, ब्रेक अप्स और सोशल मीडिया की लत सबसे ज्यादा देखने को मिलती है. बीते रविवार 30 जून, 2024 को दिल्ली में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से ऐसे ही युवाओं को दिशा देने के लिए मेगा यूथ फेस्ट का आयोजन किया गया. इस फेस्ट का नाम दिया गया था- उठो पार्थ, युद्ध करो. मानेकशॉ ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में जाने माने स्टैंड-अप कॉमेडी आर्टिस्ट, नृत्य-नाटक कलाकार और मोटिवेशनल स्पीकर्स ने हिस्सा लिया.

इस पीस प्रोग्राम को देखने सुनने के लिए करीब हजार युवा हॉल में जमा थे. वहीं कई शैक्षिक संस्थानों के वाइस प्रिंसिपल, डीन, विभागाध्यक्ष भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे. अतिथि वक्ता के तौर पर अवध ओझा सर और जाह्नवी पंवर ने मौज़ूदगी दर्ज़ कराई. जबकि फेस्ट का आयोजन आशुतोष महाराज की साध्वी शिष्याओं द्वारा किया गया.

तनाव से सबकी जिंदगी प्रभावित होती है

पीस प्रोग्राम की सह-प्रभारी साध्वी डॉ. निधि भारती ने कहा कि आज युवा करियर और पेशे की भाग दौड़ में होने वाली थकान से छुटकारा पाने के लिए रील्स, वेब सीरीज और ऑनलाइन गेम्स का सहारा लेते हैं जो कि उनके भीतर तनाव को कम करने की बजाय ज्यादा बढा देते हैं. तुरंत मनोरंजन पाने के चक्कर में वह तुरंत लव रिलेशन भी बनाने लग जाता है. साध्वी डॉ. निधि भारती का कहना था कि इससे युवाओं की मानसिकता पर गहरा असर पड़ता है और जिंदगी प्रभावित होती है.

इस कार्यक्रम के दौरान सच्ची प्रेम गाथाओं पर आधारित एक संगीतमय प्रस्तुति भी हुई. इस दौरान साध्वी मणिमाला भारती ने कहा कि इंस्टेंट लव, हुक-अप्स और ब्रेकअप्स वाले रिश्ते वेस्टर्न सोसायिटी की देन है. जबकि भारतीय संस्कृति ने दुनिया को हमेशा से त्याग, समर्पण, विश्वास और पवित्रता जैसे मूल्यों पर आधारित सच्चे-प्रेम का पाठ पढ़ाया है. साध्वी ने इस दौरान रानी पद्मावती और रतन सिंह की प्रेम कहानी का उदाहरण दिया. जिसमें रतन सिंह अपने प्रेम की गरिमा बनाये रखने की ख़ातिर योद्धा बनकर डटे रहते हैं. वहीं रानी पद्मावती भी अपने प्रेम की पवित्रता को बनाये रखती है.

व्यसन की मजबूरी तबाह कर देती है

कार्यक्रम की मुख्य प्रभारी साध्वी तपेश्वरी भारती ने कहा कि आज का युवा ये दिल मांगे मोर का राग अलापते हुए धड़ल्ले से सोशल मीडिया को फॉलो करते हैं. यहां तक कि अश्लील कंटेंट देखने की भी लत लग जाती है. साध्वी ने आध्यात्मिक गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के कथन को रेखांकित करते हुए कहा कि जब व्यक्ति सिगरेट के धुंए का पहला छर्रा उड़ाता है, तब साथ में खूब ज़ोर से खांसता भी है. उसकी अंतर्चेतना उसे आगाह करती है कि यह उसके लिए हानिकारक है. पर क्या इस अनुभव को लेने के बाद भी वो धूम्रपान करना छोड़ देता है? नहीं! ठीक ऐसा ही होता है जब वो शराब पीता है. लेकिन उसके व्यसन की मजबूरी उसे तबाह कर देती है.

अतिथि वक्ता और सिविल परीक्षा के मशहूर टीचर अवध ओझा सर ने कहा- मेरा मानना ​​है कि आज के युवाओं में जितनी भी लतें है, उनके पीछे एक बुनियादी इकाई है- वह है उनका मन. और इस चंचल मन को काबू में करने का एकमात्र तरीका भारतीय परम्परा में निहित ध्यान की प्रक्रिया ही है. दूसरी अतिथि वक्ता वंडर गर्ल जाह्नवी पंवर ने सबसे पहले हरियाणवीं और अंग्रेजी लहज़े में एक अनोखी जुगलबंदी प्रस्तुत की. इसके साथ ही उन्होंने अपने अनुभव साझा किये.

उन्होंने बताया कि वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए अनगिनत दिनों तक डटी रही. अंगेज़ी भाषा के अनेक लहज़ों पर महारत हासिल करने के लिए वह कई सालों तक लाल किले और इंडिया गेट पर जाकर घंटों विदेशियों से बातचीत कर प्रैक्टिस करती थी. आखिरी में नृत्य सत्र में उपस्थित युवा भक्ति की फ्यूज़न धुनों पर थिरकते और आनंद लेते नज़र आये. इस मेगा यूथ फेस्ट से युवाओं को सूझवान लाइफस्टाइल को अपनाने की सच्ची प्रेरणा मिली.

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