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चुनावी नतीजों के दिन कैसा रहता है शेयर बाजार, छाएगी मायूसी या रहेगी बहार?

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एग्जिट पोल और उसका असर शेयर बाजार में दिख गया है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है. 1 फरवरी 2021 के बाद शेयर बाजार में एक दिन में सबसे ज्यादा बढ़त देखी गई है. रिलायंस इंडस्ट्रीज से लेकर अडानी ग्रुप तक की कं

इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमें 20 साल पीछे जाना होगा. जी हां, साल 2004 में चुनावी नतीजे एग्जिट पोल के तमाम आंकड़ों और अनुमानों को पलटते हुए दिखाई दिए थे और शेयर बाजार में मामूली तेजी इसलिए देखने को मिली थी क्योंकि एग्जिट पोल के अगले दिन शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था.

वहीं दूसरी ओर साल 2009 के चुनाव में सेंसेक्स ने जितनी लंबी छलांग लगाई, ऐसी किसी ने भी नहीं देखी होगी. उस दिन शेयर बाजार में 17 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला था. साल 2014 में एक फीसदी से ज्यादा और 2019 में बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ.

पनियों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि आखिर चुनावी नतीजों के दिन शेयर बाजार कैसा रहेगा?

आइए जरा चलते हैं इस सफर पर और आंकड़ों की भाषा में समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर बीते 20 साल में जितने भी लोक​सभा चुनाव हुए और नतीजे आए उस दिन शेयर बाजार की चाल कैसी देखने को मिली है. वहीं साल 2024 के लोक​सभा चुनाव के नतीजों के दिन शेयर बाजार रफ्तार कैसी देखने को मिल सकती है.

2004 में फ्लैट रहा था बाजार

साल 2004 लोकसभा चुनाव के नतीजे एग्जिट पोल के बिल्कुल उलट दिखाई दिए थे. 13 मई 2004 को चुनाव के नतीजे आए. उस दिन सेंसेक्स 5399.47 अंकों पर बंद हुआ. जबकि एक दिन पहले 13 मई को सेंसेक्स 5358.35 अंकों पर बंद हुआ था. इसका मतलब है कि सेंसेक्स में 0.77 फीसदी यानी 41.12 अंकों का इजाफा देखने को मिला था.

दूसरी ओर निफ्टी भी बिल्कुल फ्लैट ही देखने को मिला था. आंकड़ों के अनुसार नेशनल स्टॉक​ एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 12 मई को 1,711.10 अंकों पर बंद हुआ था और चुनाव के नतीजों के दिन निफ्टी 0.37 फीसदी यानी मात्र 6.4 अंकों की मामूली बढ़ोतरी के साथ बंद हुआ.

2009 में टूट थे सभी रिकॉर्ड

साल 2009 का लोकसभा चुनाव ऐसे दौर में हुआ था जब पूरी दुनिया रिसेशन के दौर से गुजर रही थी. उस देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पॉलिसी की तारीफ सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हुई थी क्योंकि उन्होंने ऐसे नाजुक दौर में देश की इकोनॉमी को थामकर रखने में सफलता हासिल की थी. जिसका इनाम उन्हें साल 2009 के इलेक्शन के बाद चुनावी नतीजों के रूप में मिला.

2009 के चुनावी नतीजों के दिन यानी 16 मई को शनिवार था. जिसकी वजह से बाजार बंद था. सोमवार को जब 18 मई को सेंसेक्स ओपन हुआ तो 17.34 फीसदी की तेजी देखने को मिली. 15 मई को सेंसेक्स 12173.42 अंकों पर बंद हुआ था और 18 मई को सेंसेक्स 14284.21 अंकों पर बंद हुआ. यानी 2,110.79 अंकों की तेजी देखने को मिली. जबकि निफ्टी 2.09 फीसदी या 75.3 अंकों की तेजी के साथ 18 मई को 3,673.15 अंकों पर बंद हुआ था. 15 मई को निफ्टी 3,597.85 अंकों पर था.

जब नरेंद्र मोदी के ऐरा की हुई शुरुआत

साल 2014 से राजनीतिक और आर्थिक तौर पर मोदी ऐरा की शुरुआत हुई. चुनावी नतीजे 16 मई को आए थे. उससे पहले 15 मई को सेंसेक्स 23905.60 अंकों पर दिखाई दिया था. 16 मई को सेंसेक्स 24171.74 अंकों पर बंद हुआ. इस दिन सेंसेक्स 1.11 फीसदी यानी 266.14 अंकों की बढ़ोतरी देखने को मिली.

दूसरी ओर निफ्टी 7200 से ज्यादा अंकों के साथ बंद हुआ था. अगर आंकड़ों को देखें तो 15 मई को निफ्टी 7,123.15 अंकों पर देखने को मिला था और 16 मई को 7,203.00 अंकों पर बंद हुआ. इसका मतलब है कि निफ्टी चुनावी नतीजों के दिन 1.12 फीसदी यानी 79.85 अंकों की तेजी देखने को मिली थी.

जब दूसरी बार जीती थी मोदी सत्ता

साल 2019 में मोदी सत्ता लगातार दूसरी और ज्यादा मजबूती के साथ जीती. 23 मई को नतीजों का ऐलान हुआ था. 22 मई को सेंसेक्स 39110.21 अंकों पर बंद हुआ. 23 कमई को चुनावी नतीजों को देखते हुए सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान 40 हजार अंकों को भी पार कर गया था. लेकिन उसके बाद प्रॉफिट बुकिंग शुरू हो गई. बाजार बंद होने के बाद सेंसेक्स 0.76 फीसदी या 298.82 अंकों की गिरावट के साथ 38811.39 अंकों पर दिखाई दिया.

निफ्टी की हालत भी कुछ ऐसी की देखने को मिली थी. 22 मई को निफ्टी 11,737.90 अंकों पर बंद हुआ था. 23 मई को चुनावी परिणामों के दौरान निफ्टी 12 हजार अंकों के लेवल पर को क्रॉस कर गया. उसके बाद बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली और 0.69 फीसदी यानी 80.85 अंकों की गिरावट देखने को मिली और 11,657.05 अंकों पर बंद हो गया.

4 जून को कैसा रिएक्ट कर सकता है बाजार?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 4 जून को शेयर बाजार किस तरह से रिएक्ट कर सकता है? शेयर बाजार एक्सपर्ट पुनीत किनरा के अनुसार अगर चुनावी नतीजे एग्जिट पोल की तरह ही रहते हैं तो शेयर बाजार में एक बार फिर से 5 फीसदी तक की तेजी देखने को मिल सकती है. उसके बाद शेयर बाजार नीचे जरूर आएगा और ठीक नंबर पर सेटल होगा. वहीं अगर नतीजे हंग पार्लियामेंट की ओर जाते हैं, जिसकी संभावना ना के बराबर दिखाई दे रही है तब शेयर बाजार में 10 फीसदी तक का लोअर सर्किट लगता हुआ दिखाई दे सकता है.

3 साल बाद देखी गई सबसे बड़ी तेजी

सोमवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 2,507.47 अंक यानी 3.39 प्रतिशत उछलकर रिकॉर्ड 76,468.78 अंक पर बंद हुआ. यह पिछले तीन साल में एक दिन में सबसे बड़ी तेजी है. कारोबार के दौरान सूचकांक एक समय 2,777.58 अंक चढ़कर रिकॉर्ड 76,738.89 अंक तक चला गया था.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 733.20 अंक यानी 3.25 प्रतिशत उछलकर अपने अबतक के सर्वोच्च स्तर 23,263.90 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 808 अंक यानी 3.58 प्रतिशत चढ़कर रिकॉर्ड 23,338.70 अंक पर पहुंच गया था. सेंसेक्स और निफ्टी में एक फरवरी, 2021 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी तेजी है. उस समय बजट पेश करने के बाद दोनों सूचकांक करीब पांच प्रतिशत मजबूत हुए थे.

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