Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jantar Mantar Protest: दिल्ली में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ MCIM का बड़ा प्रदर्शन, कई सांसद होंगे श... BJP News: 'सार्वजनिक जीवन में रखें शुचिता', पार्टी नेताओं को महंगे तोहफों से बचने की सलाह; चुनावी रा... Hyderabad Crime: मणिकोंडा के फ्लोटिला अपार्टमेंट में 'चड्डी गैंग' का धावा, महिला पर हमला कर लाखों की... Mumbai Illegal Construction: मुंबई में 14 फीट से ऊपर बने मकानों पर घमासान, कांग्रेस और शिवसेना UBT न... Kanpur Flood News: पांडु नदी के उफान में फंसा गर्भवती महिला का परिवार, 25 मिनट में NDRF ने किया सुरक... UP Politics: यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों का सियासी गणित, 8 वोटों की खातिर क्या फिर होगी क्रॉस वोटि... Agra News: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक घर पर कांग्रेस का हंगामा, दीवार पर पोती कालिख; ... Traffic Challan Recovery: नहीं भरा ट्रैफिक चालान तो कट जाएगी बिजली! सुप्रीम कोर्ट का बिजली बिल से जो... Barapullah Phase 3 Inauguration: दिल्ली को मिली बड़ी सौगात, अमित शाह कल करेंगे बारापुला फेज-3 का उद्... UP Crime News: फतेहपुर के मलवां कस्बे में भीषण सिलेंडर विस्फोट, मकान मलबे में तब्दील; सीएमओ ने की 4 ...

घरेलू हिंसा, मोटापा और… बिहार में शराब बैन का क्या पड़ा असर?

30

बिहार में शराबबंदी का सकारात्मक असर दिखाई दिया है. एक सर्वे के मुताबिक, इसकी वजह से 21 लाख घरेलू हिंसा के मामलों को रोका गया है. साथ ही साथ लोगों की सेहत सुधरने पर भी असर पड़ा है. द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया जर्नल में एक रिसर्च प्रकाशित की गई है. रिसर्च के मुताबिक, बिहार में शराब बैन होने की वजह से 18 लाख पुरुषों को मोटापे से ग्रस्त होने से रोका गया है.

अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान, गरीबी, स्वास्थ्य और पोषण प्रभाग, अमेरिका सहित शोधकर्ताओं की एक टीम ने राष्ट्रीय और जिला स्तर के स्वास्थ्य व घरेलू सर्वे के आंकड़ों का विश्लेषण किया है. उनका कहना है कि शराब को लेकर बनाई गईं कड़ी नीतियां बार-बार शराब पीने वालों और घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं.

अप्रैल 2016 में सूबे की सरकार बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम लेकर आई थी, जिसके जरिए पूरे राज्य में शराब बनाने, ट्रांसपोर्ट, बिक्री और खपत पर रोक लगा दी थी. रिसर्च के मुताबिक, बिहार में बैन से पहले पुरुषों की ओर से बार-बार शराब पीने की दर 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई थी, जबकि पड़ोसी राज्यों में यह 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 10.3 प्रतिशत हो गई थी. बैन के बाद बिहार में साप्ताहिक शराब का सेवन घटकर 7.8 प्रतिशत रह गया, जबकि पड़ोसी राज्यों में यह बढ़कर 10.4 प्रतिशत हो गया.

यौन हिंसा के मामले में 3.6 फीसदी आई कमी

रिसर्च में महिलाओं के खिलाफ शारीरिक हिंसा में कमी भी देखी गई है. भावनात्मक हिंसा के मामले 4.6 प्रतिशत कम हुए हैं. वहीं, यौन हिंसा के मामले में 3.6 फीसदी की गिरावट आई है. अनुमान है कि बार-बार शराब पीने वाले 24 लाख लोगों पर रोक लाई गई है. रिसर्च करने वालों का कहना है कि इस तरह की फाइंडिंग के जरिए देश के अन्य राज्यों में शराब बैन को लेकर विचार करने और नीति-बनाने में मदद मिल सकती है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.