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4 दिन, 5000 पर FIR और 6 गिरफ्तारियां… हल्द्वानी हिंसा में कहां तक पहुंची पुलिस की जांच?

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हिंसा की आग में दहले उत्तराखंड के हल्द्वानी में पुलिस लगातार आरोपियों की धर पकड़ में लगी हुई है. अब तक पुलिस ने 100 लोगों की हिरासत में लिया है. वहीं, मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक सहित 5 लोगों की अब तक इस मामले में गिरफ्तारी हो चुकी है. इसी के साथ कुल 5000 लोगों पर FIR दर्ज की गई है, जिनमें से 19 नामजद आरोपी हैं. सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद पुलिस दिन रात इसी मामले की कार्रवाई में जुटी हुई है. बीते चार दिनों से यहां कर्फ्यू लगा हुआ है.

नैनीताल के एसएसपी ने बताया कि पुलिस कई और मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश कर रही है. पुलिस के रडार पर अब्दुल मलिक के साथ और कई साजिशकर्ता हैं. हिंसा के दौरान अब्दुल का जिसने भी साथ दिया, पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है. जल्द ही उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा. कई आरोपी तो उत्तराखंड के बाहर भाग चुके हैं. जिसके लिए दिल्ली और यूपी समेत अन्य राज्यों की पुलिस की मदद से उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई जारी है. पुलिस बनभूलपुरा इलाके के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और जांच के आधार पर पुलिस अब उपद्रवियों को उनके घर से निकाल कर गिरफ्तार कर रही है. पुलिस उपद्रवियों के रिश्तेदारों से भी पूछताछ कर रही है.

पुलिस की मानें तो इस हिंसा को सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया है. जिस तरह से नगर निगम की टीम और पुलिस टीम पर हमला हुआ वो साजिश का ही हिस्सा है. जिन 6 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनमें 2 पूर्व पार्षद और 2 समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता हैं. वहीं, एक मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक है. अब्दुल का ही मलिक बगीचा पर कब्जा था, जहां पर अवैध निर्माण ढहाने प्रशासन की टीम गई थी.

9 फरवरी को पुलिस को जांच में पता चला था कि हिंसा के दौरान 6-7 उपद्रवी पट्रोल बम बना रहे थे. बाइक से पेट्रोल निकालकर उपद्रवी बम बना रहे थे. हिंसा वाले दिन बनभूलपुरा के बाहरी इलाके में रेलवे लाइन के आसपास की झुग्गियों से भी कुछ लोग उपद्रवियों के झुंड में देखे गए थे, जहां पर रोहिंग्या मुस्लिम आबादी रहती है. हिंसा में पुलिस रोहिंग्या मुस्लिम और अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.

हल्द्वानी हिंसा के दिन क्या हुआ?

हल्द्वानी में 8 फरवरी को दोपहर एक बजे पुलिस प्रशासन की टीम बनभूलपुरा क्षेत्र में नजूल जमीन (जिस पर किसी का मालिकाना हक ना हो) पर बने मदरसे और मस्जिद को हटाने के लिए गई थी. दरअसल, प्रशासन का कहना है कि मदरसे और मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से हुआ है. हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को उसे हटाने का आदेश दिया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए टीम वहां पहुंची. स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. पहले पुलिस की टीम पर पथराव किया गया और फिर पूरे शहर में हिंसा फैल गई. जैसे ही टीम ने मदरसे और मस्जिद पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की तो महिलाएं और स्थानीय निवासियों की गुस्साई भीड़ विरोध में सड़क पर उतर गई और पुलिसकर्मियों के साथ उनकी बहस हो गई. फिर नारेबाजी हुई और टीम पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए.

6 की मौत, 300 लोग घायल

देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दंगे शुरू हो गए. पुलिस ने आक्रोशित भीड़ पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज किया, लेकिन बवाल बढ़ने लगा. तब रामनगर से अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई. बवाल करने वाली भीड़ ने आगजनी की, मकानों और दुकानों पर तोड़फोड़ की, दर्जनों गाड़ियों को फूंक डाला, जिसके बाद इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया. बता दें, इस हिंसा में अब तक 6 लोगों की मौत हुई है और 300 के करीब लोग घायल हुए हैं. घायलों में 100 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं.

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