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नर्मदा नदी में मशीनों से निकाली जा रही रेत, माफियाओं पर नहीं हो रही कार्रवाई

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ओंकारेश्वर। नर्मदा नदी में रेत का अवैध कारोबार रोकने के जिला प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। रेत माफियाओं के आगे प्रशासन की कार्रवाई भी कारगर साबित नहीं हो रही है। राजस्व विभाग के अधिकारियों की दबिश से पहले ही रेत माफिया चकमा देकर भाग निकले। अब तक कोई बडी कार्रवाई इन लोगों पर नही हो सकी है।

मांधाता थाना अंतर्गत नृसिंह कुंड से लेकर बिल्लौरा तक रेत माफिया नर्मदा नदी में पनडुब्बी मशीनें लगाकर रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। इतना ही नहीं रेत निकालने के लिए पाइप लाइन भी डाल दी गई है। अनेक कश्तियों से रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन किया जा रहा है।

एक दिन में लाखों रुपये की निकाली जा रही रेत पनडुब्बी मशीन से नदियों की तलहटी से अवैध रूप से नियमों को ताक पर रखकर रेत निकाली जा रही है। पनडुब्बियां नर्मदा नदी में थापना और ग्राम बिल्लोरा के रेत माफियाओं के द्वारा कई जगह लगाई गई है।

ऐसे काम करती है पनडुब्बी

जानकारों के अनुसार एक पनडुब्बी मशीन तैयार करने में चार से छह लाख रुपये की लागत आती है। पनडुब्बी में बड़े ट्रक का इंजन इस्तेमाल होता है। नदी के तलहटी से रेत खींचने 40 से 50 फीट प्लास्टिक पाइप डाला जाता है। इंजन के दूसरे सिरे पर रेत फेंकने के लिए सैकड़ों फीट लंबी पाइप लाइन लगाकर रेत घाट तक पहुंचाई जाती हैं। पाइप लाइन के नीचे लोहे कि ड्रम को बांधा जाता है ताकि रेत के वजन से पाइप नदी में न डूबे। इंजन में हैवी पंखा लगाया जाता है। जो पानी के तल से रेत खींचता है। रेत खींचने के लिए पनडुब्बी को नाव पर रखकर गहरे पानी में ले जाते हैं। यह मशीन से सुबह से शाम तक 10 से 12 हजार फीट रेत खींच रही है।

नर्मदा नदी में मशीनों से उत्खनन पर एनजीटी की रोक

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कोर्ट ने नर्मदा नदी में रेत उत्खनन करने के लिए किसी भी प्रकार की मशीन पोकलेन,पनडुब्बी, बुलडोजर सभी पर रोक लगा रखी है। बिना पर्यावरणीय मंजूरी के रेत निकालना अवैध है। रोक के बावजूद एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ग्राम थापना,बिल्लोरा क्षेत्र के रेत माफियाओं द्वारा खुले आम पनडुब्बी मशीनों से अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है।

नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी में सरकार ने मशीनों से रेत उत्खनन पर रोक लगाई है।राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश रेत खनन परिवहन भंडारण एवं व्यापार नियम 2019 में संशोधन की अधिसूचना में इसके प्रावधान किए हैं। नए नियमों में नर्मदा नदी में मशीनों से रेत उत्खनन कार्य नहीं किया जा सकता है। जबकि नर्मदा नदी में अवैध खनन को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं।

नर्मदा नदी के लिए यह किए गए प्रावधान

रेत खनन के लिए जारी हुए नियमों में प्रावधान किया गया है कि नर्मदा नदी में रेत उत्खनन के लिए मशीनों का उपयोग नहीं किया जाएगा। इससे नर्मदा नदी में जैव विविधता को बरकरार रखने की कोशिश की जाएगी। नर्मदा नदी में स्वीकृत रेत खदानों में मशीनों के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है। नियमों में यहां भंडारण भी मशीन से करने की इजाजत नहीं दी गई है। नर्मदा के अलावा बाकी नदियों में मशीन से खनन की अनुमति होगी। हालांकि इसके लिए जरूरी अनुमतियां जरूरी है।

ग्राम पंचायत बिल्लोरा के प्रदीप सोलंकी, गोवर्धन प्रजापति और आकाश शुक्ला ने कलेक्टर सहित उच्च अधिकारियों को शिकायत के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होने पर अब जनसुनवाई में आवेदन देने की बात भी कही है। उन्होने कलेक्टर और मुख्यमंत्री को शिकायत कर अवैध रेत खनन बंद कर खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पुनासा एसडीएम शिवम प्रजापति से अवैध उत्खनन के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं जानकारी लेकर बताता हूं। वहीं ड़िप्टी कलेक्टर बजरंग बहादुर सिंह ने बताया की मैं मंदिर प्रोटोकाल देख रहा हूं। मंदिर से संबंधित कोई मामला होतो चर्चा करें।

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