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आंवला नवमी 21 नवंबर को, इसी दिन हुई थी सतयुग की शुरुआत, जानें क्या है पौराणिक मान्यता

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इंदौर। हिंदू धर्म में आंवला नवमी प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है और इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल अक्षय नवमी या आंवला नवमी कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और देवउठनी एकादशी से दो दिन पहले मनाया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में आंवला नवमी का काफी शुभ दिन माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

आंवला नवमी 21 नवंबर को

पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, इस बार अक्षय नवमी 21 नवंबर मंगलवार को है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए पूर्व दिशा की ओर आंवले के पेड़ के नीचे बैठे। आंवला नवमी कथा और बिन्दायक कथा का पाठ करें। देसी घी का दीया जलाते हुए आंवले के पेड़ के चारों ओर सात बार लाल बांधें। भगवान विष्णु या कृष्ण की आराधना करें।

इसी दिन हुई थी सतयुग की शुरुआत

आंवला नवमी का त्योहार मथुरा-वृंदावन में उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां महिलाएं आंवला नवमी पर व्रत रखती है। यहां काफी ज्यादा तादाद में भक्त गोवर्धन परिक्रमा के लिए भी पहुंचते हैं। एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि अक्षय नवमी के दिन से ही सत्य युग की शुरुआत हुई थी।

आंवला नवमी पर हुआ था कंस वध

आंवला नवमी से जुड़ी एक और कथा प्रचलित है। इस कथा के मुताबिक, भगवान कृष्ण ने अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाने के लिए अपने मामा कंस का वध करने के लिए आंवला नवमी पर ही वृंदावन और गोकुल की गलियों से मथुरा की यात्रा शुरू की थी।

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