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मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के क्रियान्वयन रोक बरकरार, 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई

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जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के क्रियान्वयन पर पूर्व में लगाई रोक को आगामी सुनवाई तक बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना व न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मप्र शासन की ओर से रोक हटाने की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने मांग अस्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 24 नवंबर निर्धारित कर दी है।

मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के क्रियान्वयन रोक बरकरार

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह पहले अगस्त में ठेकेदार परिवहनकर्ताओं को आगामी आदेश तक राशन सामग्रियों की परिवहन करने की अनुमति प्रदान की थी। करीब 50 परिवहन ठेकेदारों की याचिका पर सुनवाई के दौरान शासन की ओर से रोक हटाने की मांग की गई थी। यह योजना प्रदेश भर की 27,000 उचित मूल्य की दुकानों के लिए लागू की गई थी।

इसमें राज्य शासन ने प्रदेश भर के लगभग 27 हजार उचित मूल्य की शासकीय किराना व राशन दुकानों में उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्रियों के परिवहन का संचालन अपने हाथ में ले लिया और यह कार्य जनपद पंचायत स्तर पर युवाओं से कराकर उनको रोजगार देने की पहल की थी। जनवरी 2023 से पूर्व जिन परिवहनकर्ता ठेकेदारों को परिवहन करने के लिए निविदा दी गई थी, उन सभी के ठेकों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी।

रेवड़ी बांटकर जनता को प्रलोभन

हाई कोर्ट की युगलपीठ ने निविदाकर्ताओं की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। परिवहनकर्ता ठेकेदारों की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता और सिद्धार्थ गुलाटी ने पैरवी की। राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता सौरभ मिश्रा व यशराज बुंदेला ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अंतरिम आदेशों के चलते योजना का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। बहुत सारे बेरोजगार युवा उसके लागू होने की राह देख रहे हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं के ओर से दलील दी गई कि राज्य शासन की ओर से यह योजना चुनाव के समय रेवड़ी बांटकर जनता को प्रलोभन की मंशा से लागू की गई है।

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