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नगर में फर्जी लैब संचालकों की भरमार, विभाग पर लग रहे सांठगांठ के आरोप

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सारंगपुर। नगर सहित ब्लाक में इन दिनों पैथोलॉजी लैब सेंटर जगह-जगह दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों की मानें तो गांव की गलियों में कुकुरमुत्तों की तरह खुले इन लंबी पर प्रशिक्षित हीन लोग जांच कर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने से बाज नही आ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इस बात की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नहीं है बल्कि संबंधित विभाग के आलाधिकारी सब कुछ जान कर भी मूकदर्शक बनकर चुप्पी साधे हुए हैं।

झोलाछाप डाक्टर व फर्जी लैब संचालकों की जानकारी एकत्रित कर फर्जी लैब संचालकों पर कार्रवाई करने के लिए लगभग 8 महीने पूर्व कलेक्टर हर्ष कुमार दीक्षित ने एक दल बना कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन उक्त निर्देश सिर्फ कागजों की शोभा ही बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं।

हाल यह है कि इन दिनों उक्त कार्रवाई ठंडे बस्ते में जाते दिखाई दे रही है जिसके कारण सकारात्मक परिणाम सामने आते नहीं दिखाई दे रहे है। नतीजन लगातार क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों फर्जी पैथालाजी लैब संचालक और फर्जी मेडिकल स्टोर संचालक धड़ल्ले से बिना लाइसेंस अपने-अपने क्लीनिक पैथोलॉजी लैब और मेडिकलों का संचालन कर रहे है।

जो क्लीनिक लैब सील थे वह पुन: खोलकर झोलाछाप अपने-अपने स्तर पर लोगों का इलाज कर जान जोखिम में डाल रहे है। पिछले दिनों झोलाछाप डाक्टरों एवं अवैध क्लीनिक और अपूर्ण कागजादों के बलबूते संचालित लैब व मेडिकल स्टोर का संचालन करने वालो पर राजस्व एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त रूप से जिले के अनेकों स्थानों पर बडी चेकिंग कार्रवाई की थी, जिसका असर मात्र कुछ दिनों तक ही रह और वर्तमान में नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रो में एक बार फिर स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले दुकाननुमा क्लीनिक फिर कुकुरमूतों की तरह पनपने लगे है।

नगरीय क्षेत्र और समीपस्थ ग्राम लीमाचौहान, संडावता, उदनखेडी, पाडल्यामाता, भैंसवामाता, गुलावता, सईदाबाग, मऊ सहित अनेक गांवों में झोलाछाप डाक्टरों का पनपना सरेआम जारी है। कई स्थानों पर तो सुसज्जित भर्ती कक्ष स्वयं के कक्ष में मेडिकल स्टोर्स व मरीज देखने के शानदार कक्ष बने हुए हैं जो आज भी खचाखच भरे रहते हैं।

निर्देश हुए बेअसर, ठंडे बस्ते में कार्रवाई

कलेक्टर द्वारा दिए निर्देश पर राजगढ सीएमएचओ सहित बनाए गए संयुक्त जांच दल को इस और ध्यान देना चाहिए। अगर बनाए दल द्वारा लगातार समय समय पर कार्रवाई जारी रखी जाती तो फर्जी डिग्रीधारी झोलाछाप डाक्टरो के पसीने तो छूटते ही साथ ही अवैध क्लेनिकों पर भी अंकुश लगता।

वहीं दूसरी और सूत्रों की माने तो कार्रवाई के अभाव में यह कदम नहीं उठाए जाने से झोलाछापों की तरह ही फर्जी लैब एवं संचालक भी अपनी मनमानी के दम पर नगर में फिर से बिना डर भय के अपनी अपनी दुकानों का संचालन कर रहे है।

जांचना चाहिए काम करने वालों की योग्यता

वैसे देखने में आता है कि यहां के अनेक मेडिकल स्टोर्स और डीलर के रूप में दवा का व्यापार करने वालों की योग्यताओं पर भी प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। कई दुकानें तो दादा परदादा के लायसेस पर चल रही है तो कई एक रजिस्ट्रेशन पर तीन तीन प्रतिष्ठान अलग अलग स्थानों पर खोल रखे है। अनेक स्टार्स तो धडल्ले से नौकरों के बलबुते चल रहे है।

इतना ही नहीं कई रजिस्ट्रेशन किराए पर लेकर मेडिकल स्टोर्स का संचालन खुलेआम हो रहा है। सूत्रो की माने तो इन मेडिकल स्टोर्स संचालकों द्वारा प्रति माह अधिकारियों को भारी भेट चढ़ाई जाती है शायद यही कारण है की इस और कार्रवाई होती नही दिखाई दे रही है।

जिम्मेदारों पर लगा सवालिया निशान

सारंगपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर और पैथालाजी लैब संचालक ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को सारंगपुर, शाजापुर इंदौर और उज्जैन के कमीशनधारी विशेषज्ञ डॉक्टर और लैब संचालकों के यहां फोन घर बुकिंग कर भेजे जाते है। मरीजों के परिजनों से जांच के नाम से ली गई भारी राशि में से कमीशन वसूलने का खेल खेला जाता है, जिस अोर विभाग का ध्यान नहीं है।

निश्चित ही सारंगपुर सहित जिलेभर में इस तरह के फर्जी लैब संचालक होंगे हमें भी कई बार इनकी शिकायत मिली है। चुनाव के बाद पूरे राजगढ़ जिले में बड़े स्तर पर छापामार कार्रवाई आप लोगों को देखने को मिलेगी। -किरण वाडिया, सीएचएमओ, राजगढ़

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