Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर किरेन रिजिजू का विपक्ष पर तीखा पलटवार रामपुरहाट टीएमसी दफ्तर में फंदे से लटके मिले पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी: सुसाइड नोट में मानसिक ... बॉम्बे हाईकोर्ट क्लर्क टाइपिंग टेस्ट में तकनीकी गड़बड़ी: वाशिम समेत कई केंद्रों पर हंगामा, छात्रों न... 'बिहार बन रहा पेपर लीक की राजधानी': तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला, 19 अगस्त को राजभवन मार्च... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने, छिड़ा सियासी घमासान बरेली: सरकारी नौकरी का झांसा देकर रचाई शादी, विरोध पर बेल्ट से पीटा और छीने जेवर; पति समेत ससुराल वा... सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, बड़ी ... भिवंडी: दरगाह में इलाज के नाम पर महिला से अघोरी रस्में व प्रताड़ना; UP भागने की फिराक में था मौलवी, ... दिल्ली में पूरा हुआ 100 'अटल कैंटीन' का संकल्प: DU मेट्रो स्टेशन से 25 नई कैंटीन शुरू, मात्र ₹5 में ... रीवा में स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही: 2 घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, सांस लेने में तकलीफ से जूझ...

आर्थिक लाभ की योजनाएं ही बन रहीं मध्य प्रदेश में चुनावी मुद्दा

58
भोपाल। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी, स्वास्थ्य-शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी या विकास के मुद्दों पर कोई बात नहीं हो रही है। हाशिये पर चले गए ये वही मुद्दे हैं जिसके दम पर वर्ष 2003 में कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार को उखाड़ फेंकने में भाजपा को सफलता मिली थी।

केवल लोक लुभावन योजनाओं की चर्चा

अब चुनावी चर्चा हो रही है तो केवल लोक लुभावन योजनाएं यानी ‘आर्थिक लाभ’ वाली योजनाओं की। दी जा रही गारंटी में सिर्फ सरकारी योजनाओं में रकम बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा है।

लाड़ली बहना के जवाब में नारी सम्‍मान योजना

भाजपा सरकार लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत एक करोड़ 31 लाख महिलाओं को 1250 रुपये प्रतिमाह दे रही है तो कांग्रेस इसे बढ़ाकर नारी सम्मान योजना में 15 सौ रुपये देने का वादा कर रही है।

कर्मचारियों को दिखाए जा रहे सपने

कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ, किसानों का दो लाख रुपये का कर्ज माफ और सौ यूनिट बिजली बिल माफ- दो सौ यूनिट हाफ जैसे लुभावने सपने दिखाए जा रहे हैं। यही वजह है कि गारंटी और वादों के सपनों में विकास के मुद्दे गुम हो गए हैं।

इस बार जुदा हैं हालात

2003 में जिन मुद्दों पर कांग्रेस को हराकर भारतीय जनता पार्टी सरकार में आई थी, उससे हालात अब जुदा हैं। चमचमाते राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। सिंचाई क्षमता सात से बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर हो गई। किसानों को खेती के लिए आठ घंटे तथा घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली 24 घंटे मिल रही है। जलजीवन मिशन से पेयजल के संकट में कमी आई है।

लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना, संबल जैसी सामाजिक परिवर्तन की योजनाएं लोगों के जीवनस्तर में बदलाव ला रही हैं। आम लोगों की नजर में भी विकास मुद्दा तो है लेकिन मप्र के विकास से लोग संतुष्ट हैं। हां, महंगाई से जरूर लोग नाराज हैं और वे चाहते हैं कि जिस तरह से गरीब वर्ग को रियायतें दी जा रही हैं, यह मध्यम वर्ग को भी उपलब्ध कराई जाएं।

इनका कहना है

इस चुनाव को कांग्रेस और राहुल गांधी जाति की राजनीति के आधार पर लड़वाना चाहते हैं, जो हम होने नहीं देंगे। भाजपा सरकार के कार्यकाल में जो विकास हुआ है, भारतीय जनता पार्टी सिर्फ और सिर्फ उसी विकास एवं सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी।

– डा दीपक विजयवर्गीय, वरिष्ठ नेता भाजपा।

भाजपा का प्रयास है कि प्रधानमंत्री का चेहरा आगे करके प्रदेश में जो प्रमुख मुद्दे हैं, उनसे जनता ध्यान भटकाया जाए पर ऐसा नहीं होगा। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिलाओं का उत्पीड़न, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग पर हो रहे अत्याचार प्रमुख मुद्दे हैं और रहेंगे।

– केके मिश्रा, अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.