Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

रिटायर्डमेंट के बाद दादा की हैसियत में बांधवगढ़ का सबसे बुजुर्ग हाथी गौतम

44

उमरिया। हाथी महोत्सव में शामिल बांधवगढ़ का सबसे उम्रदराज हाथी गौतम गश्ती के अपने कार्य से रिटायर्ड होने के बाद अब युवा और छोटे हाथियों के बीच दादा की हैसियत में है। यही वह हाथी है जिसकी सबसे ज्यादा संताने आज बांधवगढ़ में बाघों की सुरक्षा के लिए अपनी सेवा दे रही हैं। अपने रिटायर्डमेंट के बाद भी 76 साल की उम्र में गौतम अपने कुनबे के छोटे हाथियों के साथ अक्सर खेलता हुआ नजर आता है। बुढ़ापे के कारण अब वह जल्दी ही थक जाता है लेकिन इसके बाद भी उसकी आंखें हर समय चौकन्नी नजर आती हैं।

44 साल की सेवा

गौतम ने बांधवगढ़ में 44 साल तक अपनी सेवाएं दीं। 44 साल पहले जब वह बांधवगढ़ आया था तब महज 32 साल का था। गौतम का जन्म देश की आजादी से महज एक साल पहले 1946 में हुआ था। युवावस्था मेें जब वह बांधवगढ़ आया था तब बांधवगढ़ नेशनल पार्क का भले ही दायरा कम था लेकिन जंगल बेहद खतरनाक था। वर्ष 1968 में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान बना और इसके दस साल बाद 1978 में गौतम को कान्हा से यहां लाया गया। दरअसल उस समय सैलानियों को हाथियों से सैर कराई जाती थी और इसके लिए गौतम ने अपनी अहम भूमिका निभाई।

बाघों से किया सामना

बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर रहे सेवानिवृत्त सीसीएफ मृदुल पाठक बताते हैं कि गौतम बाघों के सामने डट जाता था। बाघों की दहाड़ का उस पर कोई असर नहीं होता था। जब जंगल में बाघों के बीच आपसी संघर्ष छिड़ता था तो उन्हें अलग करने के लिए सबसे पहले गौतम को ही कसा जाता था। गौतम न सिर्फ अपना बचाव करने में सक्षम था बल्कि अपनी पीठ पर सवार महावत को भी हमेशा सुरिक्षत रखता था।

यह हैं गौतम की संतन

सुंदरगज नर हाथी का जन्म 11 जून 1987 को हुआ था और अब इसकी उम्र 35 साल हो चुकी है। इस हाथी का जन्म बांधवगढ़ में हुआ था और इसकी मां का नाम तारामती है। अष्टम नर हाथी का जन्म 13 अगस्त 2002 को हुआ था। अब इस हाथी की उम्र 20 वर्ष हो चुकी है। इसका जन्म बांधवगढ़ में हुआ था और इसे तूफान ने जन्म दिया था। सूर्या नर का जन्म 21 जून 2012 को हुआ था। इस नन्हे हाथी की उम्र 10 साल पूरी हो चुकी है। इसे बांधवगढ़ में ही अनारकली ने जन्म दिया था। बांधवी मादा हाथी है जिसका जन्म 30 नवंबर 2011 को बांधवगढ़ में हुआ था। इसकी उम्र 10 वर्ष हो चुकी है और इसे बांधवगढ़ में तूफान हथिनी ने जन्म दिया था। पूनम मादा हाथी का जन्म 27 जनवरी 2013 को हुआ था। इसकी उम्र 9 वर्ष हो चुकी है। इसे सुदर्शनी हथिनी ने बांधवगढ़ में जन्म दिया था। गणेश नर हाथी का जन्म 25 मार्च 2015 को हुआ था। अब इसकी उम्र 7 वर्ष हो गई है। इसे अनारकली हथिनी ने बांधवगढ़ में जन्म दिया था।

हाथी महोत्सव में उमड़ रहे लोग

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गज महोत्सव में लोग भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। इनमें बफर के पर्यटक भी शामिल थे और आसपास के लोग भी थे। शहडोल, कटनी तक से लोग हाथी महोत्सव देखने के लिए पहुंचे। कुछ लोग तो बहुत सुबह पहुंच गए और हाथियों की पूरी सेवा और सत्कार को अपनी आंखों से देखा। हाथियों को देखने पहुंचे लोग खाने-पीने के लिए फल भी साथ लेकर आए।

सात दिन होगी सेवा और सत्कार

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में गुरुवार से शुरू हुए बांधवगढ़ गज महोत्सव में सात दिनों तक हाथियों की सेवा और सत्कार होगा। इस कार्यक्रम मे हथियों की विशेष खातिरदारी की जाएगी। उन्हे उनका प्रिय भोज गुड़ और गन्ना खिलाया जाएगा। गुड़ और आटे से बने मोटे रोट खिलाए जाएंगे। केला, सेब सहित दूसरे वे सभी फल भी खाने को दिए जाएंगे, जो हाथियों को अतिप्रिय हैं। महोत्सव के दौरान रोजाना हाथियों को स्नान कराने के बाद तेल मालिश और विशेष श्रृंगार किया जाता है। साथ ही वन्य जीव चिकित्सक उनका सूक्ष्म स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। वहीं आवश्यकतानुसार उनका उपचार भी किया जाता है। महोत्सव का समापन दो सितंबर को होगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.