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अंधे कत्‍ल का खुलासा, पत्‍नी ने बेटे और पोते के साथ मिलकर की थी पति की हत्या, यह थी वजह

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भोपाल। बागसेवनिया पुलिस ने कत्ल का राजफाश कर मृतक की पत्नी , नाबालिग समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मृतक के सीने पर लिखे दीपाली नाम से न सिर्फ उसकी पहचान हुई, बल्कि पुलिस आरोपितों तक भी पहुंची। मामूली विवाद पर पत्त्नी ने बेटे और पोते के साथ मिलकर अधेड़ की हत्या की थी। गला दबाने के बाद आरोपितों ने शव को कंबल में लपेटकर नाले में फेंक दिया था। मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी सुलझा ली।

नाले में कंबल ने लिपटा मिला था शव

पुलिस उपायुक्त श्रध्दा तिवारी ने बताया कि गत 30 जुलाई 2023 को बागसेवनिया थाना इलाके के मीनाक्षी प्लानेट बागमुगालिया के पीछे नाले में कंबल ने लिपटी एक अधेड़ का शव मिला था, शव बुरी तरह से सड़ चुका था। उसके सीने पर दीपाली नाम, सांप और सूरज जैसा गुदा था।

मुखबिर से मिली थी सूचना

पीएम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने मृतक की पहचान के लिए पंपलेट्स छपवाए। मीडिया में उसका फोटो जारी किया। इस दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि ओमनगर बागसेवनिया में एक दीपाली नाम की महिला रहती है, जिसका पति विजय पाल काफी दिनों से लापता है। मृतक विजय पाल हो सकता है।

संदेह के आधार पर पहुंची थी पुलिस

संदेह के आधार पर पुलिस मकान नंबर 58 ओमनगर बागसेवनिया पहुंची। परिजनों से विजय पाल के संबंध में जानकारी ली। आसपास के लोगों ने बताया कि करीब एक-डेढ़ महीने पहले विजय पाल का अपने सौतले बेटे तापस के साथ विवाद हुआ था। तब से विजय पाल घर पर दिखाई नहीं दिया।

पुलिस पूछताछ में टूटे आरोपित

पुलिस ने विजय के स्वजनों से पूछताछ की, जिसमें उसकी पत्त्नी दीपाली (58) ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। दीपाली ने पुलिस को बताया कि उसके पहले पति निरंजन मंडल की वर्ष 2009 में मौत हो गई थी। इसके बाद वह काम करने दिल्ली चली गई। वर्ष 2014 में विजय पाल निसे शादी कर ली थी। 8-9 महीने तबीयत खराब होने के कारण दीपाली भोपाल आ गई। कुछ दिन बाद विजय भी भोपाल आ गया।

दीपाली ने बताया कि 25 सितंबर को मेरा पोता विक्रम कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने के लिए नौ लोगों को भोपाल से अपने साथ लेकर चैन्नई जा रहा था। उन लोगों को छोड़ने के लिए विजय भी स्टेशन गया था। स्टेशन पर विजय ने विक्रम से बात करने के लिए मोबाइल मांगा। इतने में ट्रेन चल गई। मोबाइल विजय के पास छूट गया। इसी मोबाइल में विक्रम के तीन रेल टिकट और दो हजार रुपए रखे थे।

रेल के टिकट और दो हजार को लेकर मार डाला

एसीपी मिसरोद रजनीश कश्यप कौल ने बताया कि बिना टिकट होने पर विक्रम को टीसी पकड़ न ले इस बात को लेकर घर में दीपाली के बेटे तापस (41) और विजय के बीच झगड़ा हो गया। विजय ने गाली-गलौच की तो तापस ने उसे तमाचे जड़ दिए। उस समय घर में दीपाली, उसका नाबालिग पोता, विजय, तापस और उसका दोस्त राजू भोकरे (55) थे। सभी ने बीचबचाव कराया तो विजय ने उनके साथ हाथ-पाई कर दी।

बाद में तापस और नाबालिग ने विजय के दोनों हाथ पकड़ लिए। राजू ने पैर पकड़े। दीपाली, विजय के ऊपर बैठ गई और उसका गला दबा दिया। कुछ देर बाद विजय ने हिलना-डुलना बंद कर दिया। बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्होंने रस्सी से हाथ-पैर बांधे। कंबल में लाश को लपेटकर रात में मीनाक्षी प्लानेट के नाले में उसके शव को ठिकाने लगा दिया था।

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