Narmada Parikrama on Hands: अमरकंटक से शुरू हुई अनोखी नर्मदा परिक्रमा, उल्टे हाथों के बल 3500 किमी की कठिन यात्रा पर निकले संत धर्मपुरी महाराज
नर्मदापुरम: सनातन परंपरा में पैदल नर्मदा परिक्रमा करने के कई धार्मिक प्रसंग और अनुष्ठान देखने को मिलते हैं, लेकिन यदि कोई साधु उल्टे हाथों के बल यह परिक्रमा पूरी करे, तो यह अपने आप में किसी चमत्कार और अद्वितीय हठ योग से कम नहीं है। अक्टूबर 2025 में अमरकंटक से आरंभ हुई नागा साधु दिगंबर श्री धर्मपुरी महाराज की जनकल्याणकारी नर्मदा परिक्रमा यात्रा अब मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में पहुंच चुकी है। संत धर्मपुरी महाराज की इस अनूठी यात्रा की सबसे खास और हैरान करने वाली बात यह है कि वह सामान्य रूप से पैदल चलने के बजाय उल्टे होकर अपने हाथों के सहारे पूरी यात्रा तय कर रहे हैं।
तड़के 3 बजे शुरू होती है दिनचर्या, दिनभर में केवल एक रोटी और एक कटोरी दाल का करते हैं आहार
भक्तों और सेवादारों से मिली जानकारी के अनुसार, महाराज की दैनिक दिनचर्या सुबह तड़के 3 बजे से ही प्रारंभ हो जाती है। वे स्नान और ईश वंदना के पश्चात अपने इस कठिन संकल्प को आगे बढ़ाते हैं। इस पूरी 3500 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा यात्रा को पूरा करने में उन्हें लगभग 6 वर्ष का समय लगने की संभावना है। वे पूरे दिन में केवल एक रोटी, एक कटोरी दाल और एक गिलास पानी या दूध का सेवन करके अपनी इस साधना को गति देते हैं। इतनी अत्यधिक कठिन शारीरिक साधना के बावजूद उनके हाथों में न तो कभी छाले पड़े हैं और न ही शरीर में किसी प्रकार की थकान या दर्द की शिकायत होती है।
विजयादशमी 2025 को ‘माई की बगिया’ से शुरू हुई थी साधना, अब तक तय हो चुकी है 500 किमी की दूरी
संत धर्मपुरी महाराज के सेवादारों का कहना है कि इस अद्भुत साधना का शुभारंभ विजयादशमी (2 अक्टूबर 2025) के पवित्र अवसर पर अमरकंटक स्थित प्रसिद्ध स्थल ‘माई की बगिया’ से किया गया था। प्रतिदिन महाराज हाथों के बल लगभग ढाई से तीन किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इस यात्रा में सेवा दे रहे स्थानीय लोगों के अनुसार, अब तक लगभग 500 किलोमीटर की परिक्रमा सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। उनका यह संकल्प भक्ति, तपस्या और हठ योग का एक ऐतिहासिक तथा अलौकिक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
मानव कल्याण और देश में सुख-समृद्धि की कामना ही इस कठिन यात्रा का मुख्य उद्देश्य
इस यात्रा से जुड़ी श्रद्धालु बबीता जाट बताती हैं कि श्री धर्मपुरी महाराज की यह उल्टे हाथों के बल परिक्रमा पूरी तरह से अनूठी और प्रेरणादायक है। इस यात्रा का मुख्य और पवित्र उद्देश्य संपूर्ण मानवता का कल्याण करना तथा देश भर में खुशहाली और शांति लाना है। यात्रा जिस भी मार्ग से गुजरती है, वहां बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और पुष्पमालाएं पहनाकर संत का अभिनंदन करते हैं। इस कठिन साधना को देखने और महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु खिंचे चले आ रहे हैं।
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