Chhindwara Water Crisis: छिंदवाड़ा में गंभीर जलसंकट से त्रस्त जनता, महीने में सिर्फ 10-15 दिन पानी मिलने पर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुईं सैकड़ों शिकायतें
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा शहर के भीतर इन दिनों नागरिक पीने के साफ पानी के लिए बुरी तरह जूझ रहे हैं। शहर के अधिकांश इलाकों में स्थिति यह हो चुकी है कि लोगों को पूरे महीने में बमुश्किल 10 या 15 दिन ही जल आपूर्ति मिल पा रही है। एक तरफ नगर निगम पर्याप्त पानी मुहैया कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, तो दूसरी तरफ उपभोक्ताओं से पूरे महीने का पानी का बिल वसूला जा रहा है। स्थानीय रहवासियों का यह आक्रोश अब सीधे तौर पर ‘सीएम हेल्पलाइन’ (CM Helpline) पर अपनी शिकायतें दर्ज कराकर सामने आ रहा है। केवल अक्टूबर के महीने में ही शहर के परेशान नागरिकों ने पानी की भारी किल्लत को लेकर 181 नंबर पर कुल 271 शिकायतें दर्ज करवा दी हैं।
महीनों से पानी को तरस रहे शहरवासी, नगर निगम दफ्तर में सुनवाई न होने पर लगाई सीएम से गुहार
जनता का कहना है कि वे इस विकट समस्या से निजात पाने के लिए पहले अपने क्षेत्र के पार्षदों और स्थानीय स्तर पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नगर निगम के दफ्तर में उनकी शिकायतों को कोई तवज्जो नहीं दी जा रही है। जब जनता हर तरफ से निराश हो गई, तो उन्होंने मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन पर फोन लगाकर सीधे सरकार से मदद की गुहार लगाई है। आम जनता के मन में बस एक ही बड़ा सवाल बना हुआ है कि उन्हें उनके हिस्से का पर्याप्त और नियमित पानी कब मिलेगा। इस बार मानसून के दौरान बारिश की कमी के चलते पूरा शहर भीषण जलसंकट की चपेट में आ गया है। हालांकि, नगर निगम के अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी की सप्लाई की जा रही है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल विपरीत है, जहाँ लोगों को लगातार तीन-तीन दिनों तक पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हो रही है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी पानी संकट की शिकायतों के समाधान के मामले में एक तरह से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।
जल संकट से निपटने के लिए नारंगी डैम और 50 नए बोरवेल खनन की बन रही है योजना
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर विक्रम अहिके ने बताया कि शहर की इस गंभीर जल समस्या का स्थायी समाधान तलाशने के लिए नारंगी डैम का औचक निरीक्षण किया गया है। डैम के पानी को कुलबहरा नदी तक लाने के लिए एक नई रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि जलापूर्ति को सुचारू किया जा सके। इसके अलावा, शहर के विभिन्न हिस्सों में कुल 50 नए बोरवेल का खनन कराने का प्रस्ताव भी नगर निगम द्वारा पारित किया जा चुका है। वहीं, नगर निगम कमिश्नर चंद्र प्रकाश राय का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों का पूरी संतुष्टि के साथ निराकरण किया जा रहा है। पानी के वितरण को लेकर जो भी तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं, उनकी रोजाना समीक्षा करते हुए उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जा रहा है।
नगर निगम के सामने आ रही प्रशासनिक और भौगोलिक चुनौतियां
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन के सामने कई बड़ी मुश्किलें खड़ी हैं:
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नगर निगम के ग्रामीण और बाहरी वार्डों में आज भी पेयजल वितरण व्यवस्था पूरी तरह से बोरिंग के माध्यम से संचालित होती है, और इनमें तकनीकी खराबी आने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो जाती है।
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शहर के सभी 48 वार्डों में प्रतिदिन सुचारू जलापूर्ति के लिए कुल 49 एमएलडी (MLD) पानी की आवश्यकता होती है, जबकि निगम माचागोरा बांध से बमुश्किल 20 एमएलडी पानी ही ले पा रहा है।
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कायदे से पानी फिल्टर प्लांट के जरिए टंकियों में भरकर सप्लाई होना चाहिए, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में अनियमितता के कारण कई क्षेत्रों की टंकियों को समय पर नहीं भरा जा रहा है।
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सबसे ज्यादा समस्याएं ग्रामीण वार्डों के अंतर्गत बनी हुई हैं, जहां पानी की टंकियां न होने के कारण वितरण पूरी तरह बोरिंग पर निर्भर है। वर्तमान में नगर निगम के पास सबसे अधिक शिकायतें वार्ड क्रमांक 48 से दर्ज हो रही हैं।
सीएम हेल्पलाइन पर किस प्रकार की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं परेशान नागरिक
नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर समस्याएं दर्ज कराई जा रही हैं:
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आम जनता का सवाल है कि जब नगर निगम द्वारा प्रति माह 260 रुपए का भारी जलकर वसूला जा रहा है, तो फिर एक दिन के अंतराल पर भी नियमित पानी क्यों नहीं मिल रहा है।
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नलों में पानी का प्रेशर बेहद कम कर दिया गया है और सप्लाई का समय भी काफी घटा दिया गया है। पहले जहां 45 मिनट से 1 घंटे तक पानी छोड़ा जाता था, वहीं अब इसे घटाकर मात्र 15 से 20 मिनट कर दिया गया है।
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इसके अलावा, सीएम हेल्पलाइन पर लोग दूषित और गंदा पानी आने की शिकायतें भी बड़े पैमाने पर दर्ज करा रहे हैं, साथ ही निर्धारित समय-सारणी का पालन न होने से लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
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