Ujjain Nagar Pujan Tradition: उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही परंपरा, कलेक्टर-एसपी ने महामाया और महालया को लगाया शराब का भोग
उज्जैन : मध्य प्रदेश के उज्जैन में हर पर्व और त्योहार के अवसर पर प्राचीन धार्मिक परंपराओं को बेहद अनूठे और खास अंदाज में निभाया जाता है. इसी क्रम में अश्विन मास की महाष्टमी के पावन अवसर पर यहाँ देवी महामाया और देवी महालया का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया. शहर के प्रसिद्ध चौबीस खंभा माता मंदिर के पास आयोजित इस विशेष पूजन में उज्जैन सहित पूरे मध्य प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई. आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक परंपरा को सीधे तौर पर सम्राट विक्रमादित्य के समय से निभाया जा रहा है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘नगर पूजन’ के नाम से जाना जाता है.
🍷 कलेक्टर और एसपी ने की विशेष पूजा, लगभग 40 भैरव और देवी मंदिरों तक निकाली गई यात्रा
इस परंपरा के तहत उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने देवी महामाया, देवी महालया और शहर के प्रमुख भैरव मंदिरों में पहुंचकर शराब (मदिरा) का भोग लगाया और आशीर्वाद प्राप्त किया. इस पूजन की सबसे खास बात यह है कि इसके बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच लगभग 40 भैरव और देवी मंदिरों में शराब का भोग अर्पित करने के लिए एक विशाल यात्रा निकाली जाती है. इस पारंपरिक यात्रा में पुजारियों, प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में आम श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं. कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस दौरान कहा कि माता को सोलह श्रृंगार, चुनरी और बलबाकल का भोग लगाया गया है, और नगर सहित पूरे प्रदेश की समृद्धि की प्रार्थना की गई है. वहीं एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि नगर की रक्षा और सुख-समृद्धि बनी रहे, यह हम सबका सौभाग्य है कि हमें देवियों के पूजन का यह अवसर मिला.
🚶♂️ 27 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा और 12 घंटे का सफर, गढ़कालिका मंदिर में हांडी फोड़कर होती है संपन्न
तहसील कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस लंबी यात्रा के दौरान कलेक्टर और एसपी द्वारा पूजन करने के बाद तहसील कार्यालय के कर्मचारी भी इसमें शामिल होते हैं. मंदिर के पुजारी हर साल की तरह इस बार भी लगभग 31 बोतल शराब, 35 किलो बलबाकल और पूजन में लगने वाली 45 तरह की विभिन्न सामग्रियों की तैयारी करीब एक सप्ताह पहले से शुरू कर देते हैं. लगभग 12 घंटे तक चलने वाली यह पदयात्रा देवी महामाया और महालया मंदिर से आरंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए देर शाम देवी गढ़कालिका मंदिर परिसर में हांडी फोड़ने के साथ पूरी होती है. मंदिर के पुजारी अमृत लाल के अनुसार, इस पूरी यात्रा और पूजन के दौरान तेल, सिंदूर, कुमकुम, अबीर, इत्र, बलबाकल, पूड़ी, सिंघाड़े, हार-फूल, धूपबत्ती, कपूर, मदिरा, नारियल और लाल कपड़े जैसी कुल 45 प्रकार की सामग्रियां शामिल होती हैं, और अंत में मदिरा का यह प्रसाद भक्तों में भी वितरित किया जाता है. यह पूरी पैदल यात्रा करीब 27 किलोमीटर लंबी होती है.
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