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Jagdalpur News Today: बाढ़ पीड़ितों के मुआवजे और फसल सर्वे का काम ठप, सरकार से बातचीत न होने पर लंबा खिंच सकता है आंदोलन

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जगदलपुर। बस्तर में पटवारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। एक तरफ जहां बाढ़ की विभीषिका झेल चुके किसान और प्रभावित परिवार सरकार से मिलने वाले मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ पटवारियों के काम ठप करने से राजस्व संबंधी कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसका सीधा असर आगामी धान खरीदी पर भी पड़ सकता है, क्योंकि जिन किसानों की गिरदावरी का काम अभी पूरा नहीं हुआ है, उन्हें धान बेचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

📱 डीसीएस और पीवी ऐप की जटिलताओं का विरोध, ट्रांसफर-निलंबन की कार्रवाई से पटवारी नाराज

बस्तर पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष आनंद कुमार कश्यप ने बताया कि वर्तमान में किसानों से जुड़ा डीसीएस (DCS) सर्वे चल रहा था, जिसमें 95 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद बचे हुए खसरों को पीवी (PV) एप पर अपलोड करने को कहा गया। फील्ड स्तर पर खेतों के चारों कोनों में जाकर फसल दर्ज करने की यह प्रक्रिया बेहद जटिल और अव्यवहारिक है। इस कार्य का विरोध करने पर कई पटवारियों पर स्थानांतरण और निलंबन जैसी कार्रवाई की गई, जिससे पूरे प्रांतीय कैडर में भारी रोष व्याप्त है और वे हड़ताल पर चले गए हैं।

⚖️ वेतन विसंगति और पदोन्नति प्रमुख मांग, इंद्रावती बचाओ समिति ने सरकार से हस्तक्षेप की की अपील

पटवारियों की मुख्य मांगों में लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति और समयबद्ध पदोन्नति (Promotion) शामिल है, क्योंकि कई पटवारी 30 से 40 साल तक सेवा देने के बाद भी एक ही पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उधर, इंद्रावती बचाओ समिति के सदस्य लखेश्वर कश्यप ने चिंता जताई है कि यदि फसल क्षति का सर्वे नहीं हुआ तो किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा। पटवारियों के अनुसार जब तक सरकार स्तर पर एप की तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं और बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता, तब तक यह आंदोलन लंबा चल सकता है।

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