Prostate Cancer Awareness Survey: देश के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी, 60% से ज्यादा को स्क्रीनिंग की स्थिति नहीं पता
देश में प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) को लेकर पुरुषों के बीच जागरूकता की भारी कमी एक बार फिर सामने आई है। हाल ही में सामने आए एक सर्वे के मुताबिक, 45 साल और उससे अधिक उम्र के 10 में से करीब 6 पुरुषों को यह तक नहीं पता है कि उन्होंने कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच कराई है या नहीं। इसके अलावा, लगभग 84 फीसदी पुरुष ऐसे हैं जिन्होंने या तो कभी जांच नहीं कराई, जिन्हें अपनी जांच की स्थिति की कोई जानकारी नहीं है, या फिर वे यह मानते हैं कि उन्हें इसकी कोई जरूरत ही नहीं है।
हेल्थ फाउंडेशन की ओर से 1,036 पुरुषों पर किए गए इस सर्वे में दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के लोगों को शामिल किया गया था। इस सर्वे के नतीजे यह साफ बताते हैं कि हमारे देश में पुरुषों के बीच प्रोस्टेट कैंसर के खतरों, उसकी समय पर जांच और इलाज के प्रति बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है।
⚠️ 70% पुरुषों को नहीं पता बीमारी का जोखिम, डॉक्टर से बात करने में हिचकिचाहट
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि करीब 69 प्रतिशत पुरुष प्रोस्टेट कैंसर का एक भी जोखिम कारक (Risk Factor) नहीं बता सके, और केवल 13.2 फीसदी पुरुषों को ही यह जानकारी थी कि परिवार में किसी को यह बीमारी होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है।
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डॉक्टर से बातचीत में असहजता: सर्वे में शामिल लगभग 60 फीसदी पुरुषों ने माना कि वे प्रोस्टेट कैंसर की जांच या उससे जुड़े इलाज को लेकर डॉक्टर से बात करने में काफी असहज महसूस करते हैं। केवल 18 फीसदी पुरुष ही ऐसे थे जो खुद आगे बढ़कर इस विषय पर डॉक्टर से चर्चा करना चाहते थे।
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बढ़ती उम्र का भ्रम: फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नितेश रोहतगी के अनुसार, कई बुजुर्ग पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षणों को केवल ‘बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा’ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इस गंभीर बीमारी का समय पर पता चलने में काफी देरी हो जाती है।
🩸 PSA टेस्ट के बारे में भी बहुत कम लोगों को है जानकारी
प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए PSA (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) नाम का एक साधारण ब्लड टेस्ट किया जाता है, लेकिन इस बारे में भी लोगों में जागरूकता बेहद कम है।
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जानकारी का अभाव: सर्वे में शामिल केवल 31 फीसदी पुरुषों ने ही PSA टेस्ट के बारे में कभी सुना था, जबकि महज 14 फीसदी लोगों ने ही डॉक्टर से खुद इस टेस्ट की मांग की थी।
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विशेषज्ञ की सलाह: मैक्स हेल्थकेयर के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. देवव्रत आर्य का कहना है कि 45 साल से अधिक उम्र के हर पुरुष को बीमारी के जोखिम और स्क्रीनिंग के बारे में अपने डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोस्टेट कैंसर की जांच हर पुरुष के लिए एक ही उम्र में जरूरी नहीं होती; यह उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करती है। PSA टेस्ट कराने का निर्णय हमेशा डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लेना चाहिए क्योंकि इस टेस्ट में PSA स्तर बढ़ने का मतलब हमेशा कैंसर होना नहीं होता है।
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