Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Azam Khan News: जौहर यूनिवर्सिटी वित्तीय अनियमितता मामले में ईडी का शिकंजा, 416 करोड़ के अंतर पर नया... Bihar Economy & Mining: रोहतास, गया और जमुई में मिलेंगे दुर्लभ खनिज? 21 हजार करोड़ के राजस्व और लाखो... Patna NEET Girl Death Investigation: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत सख्त, 68 सवालों की सूची के सा... Jaipur Airport Alert: विमान हाईजैक के झूठे अलर्ट से जयपुर एयरपोर्ट पर मचा हड़कंप, एयर इंडिया की फ्ला... Mata Maurvi Shaktipeeth Sikar: 120 फीट ऊंचा शिखर और आधुनिक डिजिटल गैलरी, खाटू श्याम की माता का बनेगा... Ratnagiri ATS Raid: रत्नागिरी से अरबी भाषा की शिक्षिका समेत तीन लोगों से पूछताछ, व्हाट्सएप ग्रुप और ... Delhi Road Safety Report: पिछले 6 सालों में सबसे भयावह स्थिति, दिल्ली में हर दिन औसतन 17 सड़क हादसे IMD Weather Forecast: पश्चिमी विक्षोभ का असर, 14 अक्टूबर को इन राज्यों में गरज-चमक के साथ बरसेंगे बा... Indore Traffic Update: ट्रैफिक हेल्पलाइन पर मिल रही शिकायतों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, अब तक 4400 से अध... NDPS Act Action Indore: परदेशीपुरा से एमडी ड्रग्स तस्कर गिरफ्तार, पुलिस ने खंगाले पुराने आपराधिक रिक...

Ranchi Vegetable Price Hike: त्योहारों के बीच सब्जियों के दाम आसमान पर, प्याज और हरी सब्जियों ने बिगाड़ा बजट

6

त्योहारों के इस उल्लास भरे माहौल में आम उपभोक्ताओं की जेब पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। प्याज के दाम पहले से ही 50 रुपये प्रति किलो से ऊपर बने हुए थे, और अब हरी सब्जियों के दामों में आई बेतहाशा तेजी ने लोगों को गंभीर परेशानी में डाल दिया है। आलम यह है कि सब्जियों की महंगाई से बचने के लिए लोग अब विकल्प के तौर पर राजमा और सोयाबीन जैसी चीजों का सहारा लेने को मजबूर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रांची के राजभवन के नजदीक स्थित वेंडर मार्केट में लगभग हर सब्जी 50 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रही है।

🌧️ लगातार बारिश और ट्रांसपोर्टिंग कॉस्ट बनी मुख्य वजह: दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान

इस बार रांची समेत राज्य के अन्य जिलों में हुई लगातार बारिश ने सब्जी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे स्थानीय पैदावार प्रभावित हुई है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टिंग कॉस्ट (भाड़ा) बढ़ने के कारण किसान और व्यापारी दाम बढ़ाने पर मजबूर हैं। सब्जी विक्रेता मनोज साहू का कहना है कि बारिश के कारण फसलों को क्षति पहुँचने से दामों में उछाल आया है और छठ पर्व के बाद ही नई फसल आने पर कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। आम ग्राहकों का कहना है कि उनकी आय में कोई वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन बाजार में हर वस्तु के दाम दोगुने हो चुके हैं, जिससे 100 रुपये में भरने वाला थैला अब 300 रुपये में भी नहीं भर पा रहा है।

📉 नवंबर के बाद मिल सकती है राहत: स्थानीय आवक बढ़ने पर कम होंगे दाम

राहत की उम्मीद जताते हुए जानकारों का कहना है कि नवंबर के बाद सब्जियों के दाम में कमी आने की पूरी संभावना है। आमतौर पर छठ के बाद स्थानीय स्तर पर आलू, मटर, गोभी और टमाटर जैसी फसलों की पैदावार और बाजार में आवक बढ़ जाती है। वर्तमान में बेंगलुरु से आ रहे टमाटर और स्थानीय आवक के चलते इसके दाम करीब 60 रुपये प्रति किलो हैं, लेकिन सप्लाई बाधित होने पर यह 100 रुपये तक पहुँच सकते हैं। वहीं, मांग अधिक होने के कारण पटना का परवल भी 80 से 100 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.