गुरुग्राम में तेजी से गिरते भूजल स्तर पर हाईकोर्ट सख्त: 40 मीटर नीचे पहुंचा वाटर लेवल, दोगुना हो रहा दोहन
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने साइबर सिटी गुरुग्राम में लगातार पाताल में जा रहे भूजल स्तर पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है।
अदालत के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि शहर के कई प्रमुख इलाकों में भूजल स्तर गिरकर करीब 40 मीटर की खतरनाक गहराई तक पहुंच चुका है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में जितना भूजल प्राकृतिक रूप से उपलब्ध या रिचार्ज होता है, उससे दोगुना पानी हर साल बोरवेल और ट्यूबवेलों के जरिए अत्यधिक मात्रा में निकाला जा रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
⚖️ ‘वर्तमान पीढ़ी संसाधनों की ट्रस्टी है, मालिक नहीं’: हाईकोर्ट की भविष्य की पीढ़ियों को लेकर कड़ी टिप्पणी
प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर अदालत की दो टूक:
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ट्रस्टीशिप का सिद्धांत: हाईकोर्ट ने अपने अहम अवलोकन में कहा कि वर्तमान पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों की केवल एक ट्रस्टी (संरक्षक) है, मालिक नहीं।
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विनाशकारी परिणामों की चेतावनी: अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि प्राकृतिक जल संसाधनों का अनियंत्रित और अत्यधिक दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद विनाशकारी और भयावह परिणाम लेकर आएगा।
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तत्काल कदम उठाने के आदेश: कोर्ट ने संबंधित विभागों और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि भूजल स्तर को सुधारने और अवैध बोरिंग पर रोक लगाने के लिए बिना किसी देरी के ठोस व प्रभावी कदम उठाए जाएं।
🏛️ चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने दिए कड़े निर्देश: GMDA सीईओ को 5 अक्टूबर को बैठक बुलाने का आदेश
न्यायिक आदेश और उच्चस्तरीय बैठक की रूपरेखा:
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विशेष खंडपीठ का निर्देश: मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीसी मीणा को 5 अक्तूबर को सुबह 11 बजे आपात बैठक बुलाने का आदेश दिया है।
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तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी होंगे शामिल: इस उच्चस्तरीय बैठक में गुरुग्राम के उपायुक्त (DC), हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के प्रशासक, नगर निगम आयुक्त (MCG) सहित हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण और हरियाणा तालाब प्राधिकरण के प्रमुख प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल होंगे।
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केंद्रीय एजेंसियों का भी रहेगा समन्वय: बैठक में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) और केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहकर जल संरक्षण की रूपरेखा तैयार करेंगे।
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