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Jharkhand Education News: हाउसहोल्ड सर्वे में लापरवाही, 2470 शिक्षकों और 56 अधिकारियों को शोकॉज नोटिस

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रांची: झारखंड में स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों (ड्रॉपआउट) की पहचान कर उन्हें फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे ‘हाउसहोल्ड सर्वे’ (Household Survey) की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के 14 जिलों में 1322 स्कूल ऐसे मिले हैं, जहां सर्वे का काम निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सका। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 870 स्कूलों में तो सर्वे की शुरुआत तक नहीं हुई, जबकि 452 स्कूलों में यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया बीच में ही रोक दी गई।

⚖️ 2470 शिक्षकों और 56 अधिकारियों को शोकॉज: वेतन रोकने की चेतावनी

इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए राज्य परियोजना निदेशक (SPD) शशि रंजन ने संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों की जवाबदेही तय की है। कुल 2470 शिक्षकों और 56 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया गया है। अधिकारियों में संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), एसीपी, आउट ऑफ स्कूल प्रभाग के प्रभारी और एसएमसी (SMC) प्रभाग के प्रभारी शामिल हैं। सभी को 28 सितंबर तक अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर इन सभी के वेतन रोकने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शशि रंजन ने स्पष्ट किया है कि सर्वे जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लापरवाही को केवल ‘प्रगति की कमी’ के तौर पर नहीं देखा जा सकता। स्कूल से बाहर बच्चों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए घर-घर जाकर सर्वे करना अनिवार्य है। इसलिए जिम्मेदारी तय करते हुए काम को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

📉 दुमका की स्थिति सबसे खराब: 535 स्कूलों में काम अधूरा

सर्वे की जिलेवार स्थिति देखें तो दुमका जिला सबसे पीछे है। यहां 535 स्कूलों में काम पूरा नहीं हुआ है। पलामू के 379 और पाकुड़ के 140 स्कूल भी निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे हैं। इसके अलावा देवघर में 57, गोड्डा में 51, गिरिडीह में 45 और लोहरदगा में 34 स्कूलों में सर्वे अधूरा पड़ा है। वहीं साहिबगंज के 30, पश्चिमी सिंहभूम के 27, गुमला के नौ, खूंटी के सात, लातेहार के चार और धनबाद एवं गढ़वा के दो-दो स्कूलों में भी काम पूरा नहीं हुआ है।

👨‍🏫 1930 शिक्षकों ने शुरू ही नहीं किया सर्वे का काम

राज्य स्तर पर 2470 शिक्षक ऐसे हैं जो सर्वे पूरा नहीं कर पाए हैं। इनमें से 1930 शिक्षकों ने तो सर्वे शुरू तक नहीं किया, जबकि 540 ने काम शुरू करने के बाद उसे बीच में ही छोड़ दिया। दुमका जिले के सबसे ज्यादा 1027 शिक्षक इस सूची में शामिल हैं। पलामू में 722 और पाकुड़ में 278 शिक्षक सर्वे का काम पूरा करने में नाकाम रहे हैं।

✉️ पहले भी मांगा गया था जवाब: रांची को छोड़कर किसी ने नहीं दिया उत्तर

राज्य कार्यालय ने इससे पहले 27 अगस्त को भी सर्वे की धीमी प्रगति को लेकर जिलों से स्पष्टीकरण मांगा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजधानी रांची को छोड़कर किसी अन्य जिले के जिला शिक्षा अधीक्षक ने उस नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसके बाद विभाग ने दोबारा जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को शोकॉज किया है।

📋 ड्रॉपआउट बच्चों की सूची पर चर्चा नदारद: बैठकों का नहीं निकला नतीजा

सर्वे के बाद चिह्नित बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने की जिम्मेदारी एसएमसी (School Management Committee) और पीटीएम (PTM) स्तर पर भी तय की गई है। इसके बावजूद, आयोजित बैठकों में ‘ड्रॉप बॉक्स’ में दर्ज ड्रॉपआउट बच्चों और पहले से चिह्नित ‘आउट ऑफ स्कूल’ बच्चों की सूची पर कोई अपेक्षित चर्चा नहीं हुई। बैठकों का आयोजन होने के बावजूद, अभिभावकों से सीधा संपर्क कर बच्चों का दोबारा नामांकन कराने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी, जो विभाग के लिए गहरी चिंता का विषय है।

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