Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Nomadic Elephant 2026: पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास, रूम इंटरवेंशन और बोख कुश... Yogi Adityanath Delhi Visit: पीएम मोदी और जेपी नड्डा से मिले सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी चुनाव और संगठ... सोशल मीडिया पर दिखावा पड़ा भारी: यूट्यूबर मधुमिता के घर से ₹1 करोड़ के सोने-हीरे के जेवर चोरी Delhi Festive Preparations: रामलीला, दुर्गा पूजा और छठ पर्व के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई 3 विशेष समित... वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हुई बेहद आसान: अब दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति, घर आएंगे BLO मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गरमाई सियासत: राहुल गांधी ने साझा किया जिजी थॉमसन का दावा UKSSSC VPDO Scam: 2016 भर्ती घोटाले में हरीश रावत से ईडी ने किए सवाल-जवाब, कांग्रेस ने बताया बदले की... Sambhal News: आचार्य प्रमोद कृष्णम को बब्बर खालसा से जुड़ी धमकी, विदेशी नंबर से ऑडियो कॉल; गृह मंत्र... Roorkee News Today: रुड़की में दोहरे हत्याकांड से सनसनी, गांव में भारी पुलिस बल तैनात; एसएसपी बोले- ... Election Commission Reforms: चुनाव आयोग में पारदर्शिता की नई पहल, SIR प्रोसेस, ECINet और अधिकारियों ...

Kedarnath Dham Garbage Issue: केदारनाथ में बढ़ते कूड़े पर पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने जताई चिंता, हिमालयी इकोसिस्टम पर खतरा

5

देहरादून/केदारनाथ: उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में लगातार बढ़ रहे कचरे के अंबार को लेकर जाने-माने पर्यावरणविद् और हेस्को (HESCO) के संस्थापक पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पवित्र धार्मिक स्थलों पर हर दिन जमा हो रहा कूड़ा हिमालय के नाजुक पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरे का रूप लेता जा रहा है। विशेष रूप से प्लास्टिक और नॉन-बायोडिग्रेडेबल (आसानी से नष्ट न होने वाले) कचरे का यदि वैज्ञानिक और उचित तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो इसका सीधा और घातक असर यहां की मिट्टी, भूमिगत जल और संपूर्ण स्थानीय पारिस्थितिकी (इकोसिस्टम) पर पड़ेगा।

🗑️ प्रतिदिन बड़ी मात्रा में जमा हो रहा कचरा: लीचिंग से जलस्रोतों और नदियों पर संकट

प्रदूषण का प्रभाव और पर्यावरणीय नुकसान:

  • भारी मात्रा में प्लास्टिक: डॉ. अनिल जोशी के अनुसार, केदारनाथ धाम में पिछले कुछ समय से रोजाना भारी मात्रा में कचरा एकत्र हो रहा है, जिसमें सिंगल-यूज प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री की मात्रा सबसे अधिक है।

  • लीचिंग का खतरा: उन्होंने चेतावनी दी कि जब कूड़े के ढेर सड़ते हैं या बारिश के संपर्क में आते हैं, तो उससे निकलने वाला दूषित पानी (लीचिंग) मिट्टी में रिसकर प्राकृतिक जलस्रोतों को दूषित करता है।

  • नदियों और इकोसिस्टम पर असर: यह दूषित पानी आसपास के नालों और पवित्र नदियों तक पहुंचता है, जिससे पूरे हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण पर भारी दबाव बढ़ रहा है।

🧳 केवल सरकार के भरोसे समाधान संभव नहीं: तीर्थयात्रियों की जवाबदेही भी हो तय

ठोस प्रबंधन और व्यवहार में बदलाव की जरूरत:

  • श्रद्धालुओं की भागीदारी: पर्यावरणविद् ने कहा कि शासन-प्रशासन की ओर से कचरा प्रबंधन के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन केवल सरकारी तंत्र के बूते इस विकराल समस्या को हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है।

  • पैकेजिंग पर नियंत्रण: उन्होंने सुझाव दिया कि संपूर्ण यात्रा मार्ग पर अनावश्यक प्लास्टिक पैकेजिंग के उपयोग को न्यूनतम किया जाए।

  • पर्यावरण-अनुकूल विकल्प: प्लास्टिक की बोतलों और थैलियों के स्थान पर यात्रियों को स्थानीय, पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

🙏 कूड़े के ढेरों के बीच से गुजरना आस्था और व्यवस्था दोनों पर सवाल: स्वच्छ भारत का संदेश

आस्था और स्वच्छता का संतुलन:

  • चिंताजनक दृश्य: डॉ. जोशी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जब श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पवित्र मन से आते हैं और उन्हें रास्ते में बदबूदार कचरे के ढेरों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, तो यह हमारी धार्मिक आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए बेहद शर्मनाक व चिंताजनक स्थिति है।

  • वास्तविक सार्थकता: ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब देश के शीर्ष तीर्थ स्थल और संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र धरातल पर पूरी तरह स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त नजर आएं।

⚠️ प्रकृति की चेतावनियों को गंभीरता से लें: हिमालय को कूड़ाघर बनने से बचाना जरूरी

भविष्य के लिए कड़ा संदेश:

  • आपदाओं से सबक: उन्होंने याद दिलाया कि प्रकृति बार-बार भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के जरिए मानव समाज को सचेत कर रही है। समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो अपूरणीय क्षति होगी।

  • व्यक्तिगत संकल्प: डॉ. अनिल जोशी ने आम जनता से भावुक अपील की कि सफाई की जिम्मेदारी केवल सरकारी एजेंसियों पर न छोड़ें। प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं कचरा न फैलाने का संकल्प लेना होगा, ताकि देवभूमि को कूड़ाघर बनने से बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.