Delhi High Court PIL: डीटीसी बस हड़ताल से थमीं दिल्ली की रफ्तार; जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की पीठ करेगी सुनवाई
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के चालकों, परिचालकों और अन्य कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल का मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) की चौखट पर पहुंच गया है।
हड़ताल के कारण दिल्ली भर में सार्वजनिक बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने और रोजाना लाखों यात्रियों को हो रही भारी असुविधा को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका पेशे से वकील और नियमित डीटीसी बस यात्री अमी सिसोदिया द्वारा दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और गृह विभाग के खिलाफ प्रस्तुत की गई है।
⚖️ सार्वजनिक बस सेवाओं की तत्काल बहाली की मांग: 15 सितंबर से जारी है डीटीसी कर्मियों का प्रदर्शन
याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि वह संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दिल्ली में सार्वजनिक बस सेवाओं की तत्काल बहाली और उनका निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी करे।
गौरतलब है कि दिल्ली में बीते 15 सितंबर से डीटीसी और क्लस्टर बसों के ड्राइवर तथा कंडक्टर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में समान वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता (DA), मुफ्त मेडिकल सुविधाएं, समय पर ओवरटाइम का भुगतान, सालाना बोनस और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देना शामिल है। हालांकि, दिल्ली सरकार ने इस पूरे गतिरोध पर श्रम विभाग से विधिक सलाह लेने के निर्देश दिए हैं।
🎒 लाखों यात्रियों की फजीहत का हवाला: महिलाओं, छात्रों और बुजुर्गों को हो रही भारी परेशानी
जनहित याचिका में अदालत को अवगत कराया गया है कि बसों का परिचालन ठप होने से रोजाना सफर करने वाले लाखों छात्रों, दैनिक वेतनभोगियों, कामकाजी महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों, मरीजों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि दिल्ली सरकार की महिलाओं के लिए ‘मुफ्त बस यात्रा योजना’ (Pink Ticket Scheme) प्रभावित होने के कारण महिलाओं को विवश होकर ऑटो और कैब जैसे महंगे वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
🚇 बसों की कमी से दिल्ली मेट्रो पर बढ़ा दबाव: PIL में कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं
याचिकाकर्ता ने बताया कि सड़कों से बसें नदारद होने का सीधा असर दिल्ली मेट्रो (DMRC) पर देखने को मिल रहा है, जिससे मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की अप्रत्याशित भीड़ बढ़ गई है।
हड़ताल के शुरुआती दिनों में डीएमआरसी को अतिरिक्त ट्रेनें और फेरे चलाने पड़े थे। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह स्पष्ट किया है कि PIL का उद्देश्य हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों या औद्योगिक विवादों पर फैसला सुनाना नहीं है और न ही किसी व्यक्तिगत ड्राइवर या कंडक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
🏛️ जनहित में न्यूनतम परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग: बुधवार को होगी सुनवाई
याचिका का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की सड़कों पर पर्याप्त सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था को अविलंब बहाल कराना है।
पूर्ण बहाली होने तक यात्रियों की समस्याओं को कम करने के लिए न्यूनतम स्तर की वैकल्पिक बस सेवाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल इस याचिका पर बुधवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई होने की संभावना है।
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