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Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में 30 साल पुरानी 5 मंजिला PG इमारत ढही, 6 छात्रों की मौत; मकान मालिक की लापरवाही उजागर

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नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस से सटा सत्य निकेतन इलाका, जो कॉलेज छात्रों का प्रमुख ठिकाना माना जाता है, रविवार को एक भीषण और दर्दनाक त्रासदी का गवाह बना।

यहां की एक संकरी गली में संचालित 30 वर्ष पुरानी 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में 6 छात्रों की जान चली गई, जबकि कई अन्य छात्र मलबे में दब गए। इस हादसे ने राजधानी में संचालित अवैध पीजी और छात्र हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मकान मालिकों की आपराधिक लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है।

💰 15 कमरों में रहते थे दर्जनों छात्र: 12,000 रुपये प्रति बेड किराया, पर मेंटेनेंस शून्य

किराए की वसूली और सुरक्षा की अनदेखी:

  • छात्रों की संख्या और कमरे: दिल्ली पुलिस में कार्यरत स्थानीय निवासी राजन छेत्री के अनुसार, इस 5 मंजिला इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में 2 से 3 छात्र रहते थे।

  • मोटा किराया: मकान मालिक छात्रों से प्रति बेड लगभग 12,000 रुपये तक भारी-भरकम किराया वसूलते थे।

  • प्रतिष्ठित कॉलेजों के छात्र: इस पीजी में केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आकर मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म (ARSD) कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र रहते थे। इसके बावजूद मकान मालिकों ने छात्रों की सुरक्षा और बिल्डिंग के रखरखाव पर कभी ध्यान नहीं दिया।

📱 ‘ऑनलाइन किराया लेते हैं, मुड़कर देखने तक नहीं आते’: स्थानीय निवासियों के चौंकाने वाले खुलासे

पीजी संचालकों की कार्यशैली पर सवाल:

  • मकान मालिक नदारद: इलाके में पिछले 20-22 वर्षों से रह रहे स्थानीय निवासियों का कहना है कि सत्य निकेतन में धड़ल्ले से 5 से 6 मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।

  • सिर्फ मुनाफे से मतलब: मकान मालिक बोर्ड लगाकर कमरे किराए पर दे देते हैं और खुद दूसरे पॉश इलाकों में जाकर बस जाते हैं। उनका सरोकार केवल हर महीने ऑनलाइन बैंक खातों में आने वाले किराए से होता है।

  • कभी नहीं हुआ मेंटेनेंस: स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पिछले कई सालों में इस पुरानी इमारत में कभी कोई बुनियादी मरम्मत या सेफ्टी ऑडिट होते नहीं देखा।

🏚️ बेसमेंट में खुदाई और सीवर का पानी बना काल: कमजोर नींव ने ली मासूमों की जान

हादसे के तकनीकी कारण और लापरवाही:

  • कमजोर नींव: 30 साल पुरानी इस जर्जर इमारत के बेसमेंट में अवैध रूप से निर्माण कार्य और खुदाई कराई जा रही थी।

  • सीवर और बारिश का पानी: लगातार बारिश और खुले सीवर के कारण बेसमेंट में भारी जलभराव हो रहा था, जिससे इमारत की नींव पूरी तरह गल चुकी थी और दबाव नहीं झेल सकी।

  • वीकेंड होने से टला बड़ा नुकसान: रविवार का दिन और सप्ताहांत होने के कारण कई छात्र अपने घर गए हुए थे, जिससे हताहतों की संख्या और अधिक बढ़ने से बच गई, लेकिन जो छात्र कमरों में मौजूद थे, वे इस लापरवाही का शिकार हो गए।

🚒 राजधानी के पीजी हब्स में सेफ्टी ऑडिट की दरकार: प्रशासन पर उठे सवाल

रेस्क्यू ऑपरेशन और आगे की सख्त जरूरत:

  • राहत और बचाव कार्य: घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर मलबे में दबे छात्रों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू चलाया।

  • सुरक्षा मानकों की मांग: इस हादसे ने सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर, विजय नगर और करोल बाग जैसे बड़े छात्र इलाकों में बिना किसी फायर सेफ्टी, स्ट्रक्चरल ऑडिट और पुलिस वेरिफिकेशन के चल रहे अवैध पीजी पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है।

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