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JPSC परीक्षा में भारी अनियमितता का मामला: पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

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रांची (झारखंड): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है।

रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की विशेष अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत जिरह पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज औपचारिक रूप से सुनाते हुए जमानत अर्जी अस्वीकार कर दी गई।

🏛️ ‘छापेमारी में नहीं मिला कोई ठोस साक्ष्य’: बचाव पक्ष की दलीलों को अदालत ने नकारा

बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा अदालत में रखे गए प्रमुख तर्क:

  • ठोस सबूतों का अभाव: जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एल. खियांग्ते की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने पक्ष रखते हुए अदालत में कहा कि पूर्व मुख्य सचिव के विरुद्ध जांच एजेंसी के पास कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।

  • बरामदगी न होने का दावा: बचाव पक्ष ने दलील दी कि जांच एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी के दौरान भी उनके आवास अथवा ठिकानों से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या अवैध वित्तीय सामग्री बरामद नहीं हुई है।

  • जमानत की गुहार: अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि एक प्रतिष्ठित प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के फरार होने की कोई आशंका नहीं है, अतः उन्हें नियमित जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

💸 परीक्षा एजेंसी से ₹2 करोड़ कमीशन लेने का गंभीर आरोप: CID ने किया जमानत का कड़ा विरोध

जांच एजेंसी सीआईडी (CID) के प्रमुख आरोप और दलीलें:

  • गंभीर वित्तीय अनियमितता: सीआईडी ने जमानत का तीव्र विरोध करते हुए मामले को अत्यंत गंभीर और राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा बताया।

  • TDPL एजेंसी को काम दिलाने में भूमिका: जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी ‘टीडीपीएल’ (TDPL) को नियम विरुद्ध कार्य आवंटन करने में एल. खियांग्ते की सीधी भूमिका सामने आई है।

  • अपारदर्शिता की अनदेखी: सीआईडी का आरोप है कि एजेंसी द्वारा परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी और इस घपले की पूरी जानकारी होने के बावजूद तत्कालीन अध्यक्ष ने कोई सुधारात्मक या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।

  • कमीशन का लेन-देन: जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि एल. खियांग्ते ने एजेंसी से कथित तौर पर लगभग 2 करोड़ रुपये की रिश्वत व कमीशन प्राप्त किया। चूंकि जांच अभी नाजुक मोड़ पर है, ऐसे में रिहा होने पर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित किया जा सकता है।

⛓️ कांड संख्या 16/2026 में 24 से अधिक गिरफ्तारियां: कई बड़े चेहरे पहले से जेल में बंद

मामले की पृष्ठभूमि और अब तक की विधिक कार्रवाई:

  • कांड संख्या 16/2026 का पंजीकरण: जेपीएससी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अंकों की हेराफेरी समेत विभिन्न अनियमितताओं को लेकर सीआईडी ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया था।

  • पूछताछ के बाद जेल: इसी जांच के क्रम में साक्ष्य मिलने पर पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया गया था। सीआईडी ने उन्हें रिमांड पर लेकर कई दिनों तक आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की थी, जिसके बाद से वे होटवार जेल में बंद हैं।

  • अन्य नामजद आरोपी: इस बड़े परीक्षा घोटाले में अब तक 24 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इनमें आयोग में लंबे समय तक कार्यरत रहीं श्वेता गुप्ता और अभय तिवारी सहित कई अन्य अधिकारी व बिचौलिए भी न्यायिक हिरासत में हैं।

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