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दही हांडी का खौफनाक सच, ऊंचाई से गिरे नागेश की टूटी थीं हड्डियां; अब मासिक आर्थिक मदद की गुहार

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भिवंडी (महाराष्ट्र): जन्माष्टमी के उल्लास के बीच अगले दिन फोड़ी जाने वाली दही हांडी के भव्य आयोजनों में जहां मानव पिरामिड, डीजे का शोर और गोविंदाओं का अदम्य उत्साह दिखता है, वहीं कई बार यह रोमांच गंभीर हादसों की भेंट चढ़ जाता है।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले अंतर्गत भिवंडी से सामने आई नागेश भोईर की दास्तान दही हांडी के इसी दर्दनाक पहलू को उजागर करती है। साल 2009 में दही हांडी फोड़ने के दौरान मानव पिरामिड की ऊपरी मंजिल से गिरा यह युवा गोविंदा पिछले 18 वर्षों से लगातार बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है।

⚠️ 2009 में बिगड़ा था पिरामिड का संतुलन: सिर, पैर और कमर की हड्डियां हुईं चकनाचूर

हादसे का विवरण और शारीरिक आघात:

  • 24 साल की उम्र में हादसा: बात वर्ष 2009 की है, जब 24 वर्षीय नवयुवक नागेश भोईर अपने गोविंदा पथक (मंडल) के साथ मटकी फोड़ने के लिए पिरामिड की सबसे ऊपरी लेयर पर चढ़ा था।

  • असंतुलन से गिरी मंजिल: अचानक संतुलन बिगड़ने से नागेश सीधे पक्के धरातल पर आ गिरा, जिससे उसके सिर, पैर, कमर और हाथों की हड्डियां कई जगहों से टूट गईं।

  • स्थायी दिव्यांगता: इस गंभीर हादसे ने नागेश का जीवन हमेशा के लिए बदल दिया और वह पिछले 18 सालों से अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सका है।

💸 इलाज में बिकी जमापूंजी और कीमती सामान: दोस्तों की मदद भी पड़ रही कम

आर्थिक संकट और पारिवारिक लाचारी:

  • लगातार महंगी थेरेपी: नागेश को हर दो महीने में विशेष थेरेपी, मेडिकल केयर और नियमित अस्पताल की जांच से गुजरना पड़ता है।

  • आर्थिक बदहाली: अठारह वर्षों से चल रहे निरंतर उपचार के कारण परिवार की सारी जमापूंजी समाप्त हो चुकी है और घर की तमाम कीमती वस्तुएं बिक चुकी हैं। बिस्तर पर पड़े रहने के चलते नागेश का शारीरिक वजन भी तेजी से घट रहा है।

  • मित्रों का सहारा: नागेश के वृद्ध पिता निजी नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस विषम परिस्थिति में कुछ संवेदनशील मित्र अपनी मासिक तनख्वाह से एक हिस्सा देकर मदद कर रहे हैं, किंतु अस्पताल व दवाओं के बढ़ते खर्च के आगे यह सहायता भी नाकाफी साबित हो रही है।

📢 ‘जोश में जान जोखिम में न डालें’: लाचार गोविंदा ने युवाओं से की मार्मिक अपील

नागेश भोईर का दर्दभरा संदेश:

  • उत्सव की तरह खेलें: बिस्तर से ही नागेश ने प्रदेश और देश भर के गोविंदाओं के नाम संदेश जारी कर कहा कि दही हांडी को केवल खेल और सांस्कृतिक उत्सव की भावना से लें।

  • इनामी राशि और नाम की होड़ से बचें: उन्होंने अपील की कि पैसों और नाम कमाने की होड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर अपनी अनमोल जान जोखिम में न डालें।

  • परिवार की तबाही का दर्द: नागेश ने कहा कि एक दुर्घटना केवल एक गोविंदा का जीवन ही नहीं छीनती, बल्कि उसका पूरा हंसता-खेलता परिवार जीवन भर के लिए बर्बाद हो जाता है।

🙏 बुजुर्ग मां ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार: ‘एकमुश्त नहीं, हर महीने मिले स्थायी मदद’

सरकारी सहायता की मांग:

  • आंसुओं में छलका दर्द: बेटे की असहनीय पीड़ा देख बुजुर्ग मां ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भावुक होकर आर्थिक संबल की गुहार लगाई है।

  • मासिक आर्थिक पेंशन की मांग: मां का कहना है कि उनका बेटा अपनी भरी जवानी से बिस्तर पर लाचार है और परिवार पाई-पाई को मोहताज हो चुका है।

  • स्थायी समाधान की जरूरत: उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि किसी एकमुश्त राहत पैकेज के स्थान पर परिवार को हर महीने एक निश्चित और स्थायी आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि नागेश की दवाइयों और चिकित्सा का खर्च निर्बाध रूप से जारी रह सके।

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