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मप्र सरकार का बड़ा फैसला: प्रदेश के 22,098 शासन-संधारित मंदिरों की संपत्ति होगी ऑनलाइन सार्वजनिक

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भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के शासन-संधारित मंदिरों एवं देवस्थानों की संपत्तियों और प्रबंधन व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

संस्कृति विभाग ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के लगभग 22,098 मंदिरों की चल-अचल संपत्ति, वित्तीय लेखा-जोखा तथा प्रबंधकीय विवरण को एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाएगा। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य मंदिरों के वित्तीय रिकॉर्ड को डिजिटाइज कर अवैध कब्जों पर रोक लगाना और प्रबंधन को सुव्यवस्थित व पारदर्शी बनाना है।

📊 महाकाल से मैहर तक बनेगा डिजिटल डेटाबेस: आय-व्यय और पुजारी का पूरा विवरण रहेगा दर्ज

डिजिटल डेटाबेस का प्रारूप और मुख्य बिंदु:

  • प्रमुख तीर्थ शामिल: इस व्यापक डिजिटल डेटाबेस में उज्जैन के श्री महाकालेश्वर, ओरछा के श्री रामराजा सरकार और मैहर की मां शारदा देवी मंदिर समेत सभी प्रतिष्ठित धर्मस्थल शामिल किए जाएंगे।

  • पोर्टल पर उपलब्ध ब्योरा: वेबसाइट पर प्रत्येक मंदिर का आधिकारिक नाम, उसका ऐतिहासिक संदर्भ, सेवादार व पुजारी का नाम, चल-अचल संपत्ति, भूखंड का रकबा तथा वर्तमान स्थिति का स्पष्ट उल्लेख रहेगा।

  • वित्तीय पारदर्शिता: श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान, नियमित आय और दैनिक व विकासात्मक व्यय का संपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में अपडेट किया जाएगा।

🌾 1,320 मंदिरों के पास 4,500 हेक्टेयर जमीन: कलेक्टर कराएंगे नीलामी, पुजारियों को भी जिम्मेदारी

भूमि प्रबंधन और नीलामी प्रक्रिया के नियम:

  • 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले मंदिर: राज्य के लगभग 1,320 मंदिरों के पास 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि दर्ज है, जिसका कुल रकबा करीब 4,500 हेक्टेयर है।

  • कलेक्टर द्वारा नीलामी: इस प्रकार की कृषि भूमि की नीलामी संबंधित जिला कलेक्टर्स के माध्यम से पारदर्शी बोली द्वारा कराई जाती है और उससे प्राप्त समस्त आय सीधे मंदिर के अधिकृत बैंक कोष में जमा होती है।

  • छोटे मंदिरों का प्रबंधन: जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से कम भूमि है, उनके संचालन और कृषि भूमि के प्रबंधन की जिम्मेदारी पारंपरिक रूप से संबंधित मंदिर के पुजारी के पास रहती है। डिजिटल रिकॉर्ड से यह स्पष्ट रहेगा कि इस जमीन का वास्तविक उपयोग किस रूप में हो रहा है।

🚀 उज्जैन और ग्वालियर से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत: चरणबद्ध तरीके से जुड़ेंगे सभी जिले

परियोजना का चरणबद्ध क्रियान्वयन:

  • प्रथम चरण: इस महत्वाकांक्षी डिजिटाइजेशन परियोजना का पहला चरण पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन जिले के 2,536 मंदिरों और ग्वालियर जिले के 1,165 मंदिरों से प्रारंभ किया जा रहा है।

  • राज्यव्यापी विस्तार: प्रारंभिक समीक्षा के उपरांत इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी 55 जिलों, तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों के शासन-संधारित मंदिरों तक विस्तारित किया जाएगा।

🛡️ अतिक्रमण और संपत्ति विवादों पर लगेगी लगाम: धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने दी जानकारी

योजना के दूरगामी लाभ और प्रशासनिक बयान:

  • विवादों का स्थायी समाधान: आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से मंदिरों की बेशकीमती जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों, अतिक्रमणों और वर्षों पुराने भू-संपत्ति विवादों की पहचान कर त्वरित विधिक समाधान करना आसान होगा।

  • सुदृढ़ जीर्णोद्धार व्यवस्था: पुख्ता रिकॉर्ड के आधार पर ऐतिहासिक व प्राचीन मंदिरों के नियमित रखरखाव, जीर्णोद्धार और वित्तीय अनुदानों का वितरण समयबद्ध हो सकेगा।

  • विभागीय मंत्री का वक्तव्य: संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने स्पष्ट किया कि इस पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों व श्रद्धालुओं को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि कौन सा मंदिर शासकीय संधारण में है और कौन सा निजी। इससे व्यवस्थागत पारदर्शिता बढ़ेगी और मंदिरों का समग्र प्रबंधन उत्कृष्ट स्तर पर पहुंचेगा।

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