Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Duleep Trophy Final: वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच मैदान पर तीखी बहस, वीडियो वायरल होने के बाद... 'गोलमाल 5' की शूटिंग पूरी: रोहित शेट्टी की कॉमेडी फ्रैंचाइजी का इंतजार अब अंतिम चरण में कैलिफोर्निया के फ्रेस्नो में भीषण विमान हादसा: जमीन से टकराया छोटा प्लेन, 2 की मौत व 2 गंभीर 8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग में HRA और बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा, लेवल 7 कर्मचारियों की च... Xiaomi Smart Band 11 Active लॉन्च: स्लिम डिजाइन और 21 दिन की दमदार बैटरी लाइफ Masik Shivratri September 2026: 9 सितंबर को भाद्रपद मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और... रात में क्यों जरूरी है स्किन केयर: दिनभर की धूप और पॉल्यूशन से त्वचा को बचाएं मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: 'रोजगार दो या फैक्ट्री बंद करो' का दिया... Swatantra Bhardwaj Arrest: निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को न्यायिक हिरासत... Punjab Swine Flu Alert: जालंधर में स्वाइन फ्लू से पहली संदिग्ध मौत, राज्य में 220 पहुंचा H1N1 मरीजों...

राहुल गांधी की ‘जातिवाद की चाय’, कार्टून पोस्टर पर बघेल, सिंहदेव और डहरिया के कप पर सियासी घमासान

6

रायपुर (छत्तीसगढ़): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चाय की दुकानों पर जातिगत भेदभाव और अलग-अलग कपों के इस्तेमाल का मुद्दा उठाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी पारा चढ़ गया है।

छत्तीसगढ़ भाजपा ने राहुल गांधी के इस बयान पर तीखा पलटवार करते हुए एक व्यंग्यात्मक कार्टून पोस्टर जारी किया है। इस पोस्टर में राहुल गांधी को ‘जातिवाद की चाय’ की दुकान चलाते हुए दिखाया गया है, जहां ग्राहकों के रूप में कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग प्रकार के कपों में चाय परोसी जा रही है। इस कार्टून के जरिए भाजपा ने कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों और नेताओं की कथित हैसियत पर कड़ा कटाक्ष किया है, जिसके बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

🫖 तीन नेताओं के अलग-अलग कप: कांग्रेस के अंतर्कलह पर भाजपा का सीधा तंज

कार्टून पोस्टर का सांकेतिक चित्रण और राजनीतिक संदेश:

  • कप के जरिए हैसियत का पैमाना: जारी पोस्टर में पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया को प्लास्टिक के डिस्पोजेबल गिलास, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कागज (पेपर) के कप और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव को कांच के कप में चाय परोसते हुए दर्शाया गया है।

  • पार्टी की आंतरिक स्थिति पर व्यंग्य: भाजपा ने इस प्रतीकात्मक चित्रण के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राहुल गांधी देश में जातिवाद का आरोप लगाने से पहले अपनी ही पार्टी के भीतर नेताओं के अलग-अलग दर्जे और भेदभाव को देखें।

🏥 ’60 साल सत्ता में रहकर भी भेदभाव नहीं मिटाया’: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का हमला

सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से कांग्रेस पर उठाए गए सवाल:

  • ऐतिहासिक विफलता का आरोप: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी यदि सामाजिक असमानता बची है, तो इसके लिए 60 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस जिम्मेदार है।

  • समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश: मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए आज भी संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर समाज को बांटने और भड़काने का काम कर रहे हैं।

  • मोदी सरकार का समावेशी मॉडल: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पंचतीर्थों का विकास और संत कबीर के समरसता के संदेश को आगे बढ़ाकर देश को एकजुट किया जा रहा है।

🛡️ ‘डैमेज कंट्रोल कर रही भाजपा’: कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का पलटवार

कांग्रेस का तीखा विरोध और जवाबी आरोप:

  • स्तरहीन राजनीति का आरोप: कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस पोस्टर को भाजपा की हताशा और स्तरहीन राजनीति करार दिया है।

  • हल्द्वानी रैली का संदर्भ: शुक्ला ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद भाजपा समर्थित तत्वों द्वारा कथित शुद्धिकरण का मामला सामने आने से भाजपा का दलित विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है।

  • ध्यान भटकाने की कवायद: कांग्रेस का दावा है कि भाजपा अपनी जनविरोधी छवि और छुआछूत के आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कार्टून पोस्टरों का सहारा लेकर डैमेज कंट्रोल करने की नाकाम कोशिश कर रही है।

🔥 चाय की टपरी से पोस्टर वार तक: आगे और तीखी होगी सियासी लड़ाई

मुद्दे का सार और राजनीतिक विश्लेषण:

  • गंभीर मुद्दे पर पोस्टर वार: सामान्य चाय की टपरी पर होने वाली चर्चा से शुरू हुआ सामाजिक भेदभाव का यह विषय अब छत्तीसगढ़ की मुख्यधारा की राजनीति में पोस्टर वार और तीखे व्यक्तिगत हमलों में बदल चुका है।

  • चुनावी और वैचारिक दांव: दोनों ही दल एक-दूसरे को दलित व पिछड़ा वर्ग विरोधी साबित करने की होड़ में जुट गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह सियासी बयानबाजी और अधिक आक्रामक रूप लेगी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.