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मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: ‘रोजगार दो या फैक्ट्री बंद करो’ का दिया अल्टीमेटम

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मधेपुरा (बिहार): जिले में स्थापित अत्याधुनिक मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री (MELPL) को लेकर आसपास के ग्रामीणों का असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है।

स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर न मिलने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जिस जमीन पर यह विशाल संयंत्र स्थापित हुआ है, उसके विकास और रोजगार पर पहला हक स्थानीय युवाओं का है; यदि योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिला तो वे फैक्ट्री का संचालन ठप कर देंगे।

हाल ही में फ्रांसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनी एल्सटॉम (Alstom) और भारतीय रेलवे के संयुक्त उपक्रम ‘मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड’ (MELPL) द्वारा पटना में एक विस्तृत आर्थिक रिपोर्ट जारी की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-2026 के दौरान इस परियोजना ने देश भर में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक आउटपुट को सहारा दिया है। रिपोर्ट में रोजगार और बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों का दावा सामने आने के बाद फैक्ट्री से सटे गांवों में स्थानीय युवाओं की नाराजगी और अधिक भड़क उठी।

🏭 केवल असेंबलिंग का काम होने का आरोप: ‘स्थानीय स्तर पर कल-पुर्जे बनते तो मिलता काम’

ग्रामीणों के आरोप और स्थानीय विकास की उपेक्षा:

  • योग्यता की अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि संयंत्र में स्थानीय युवाओं को उनकी तकनीकी व शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप अवसर नहीं दिए जा रहे हैं।

  • असेंबलिंग यूनिट का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि रेल इंजन निर्माण के नाम पर अधिकांश पुर्जे बाहर से मंगाए जाते हैं और यहां केवल असेंबलिंग की जाती है। यदि छोटे-छोटे पार्ट्स का निर्माण स्थानीय स्तर पर कराया जाता, तो क्षेत्र के युवाओं और छोटे उद्यमियों को सीधे रोजगार मिलता (हालांकि इन आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है)।

  • अधिकारियों पर आरोप: ग्रामीण अरविंद कुमार यादव ने प्रबंधन के एक अधिकारी पर युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने जैसे गंभीर आरोप लगाए, जिसे लेकर गांव में आक्रोश है।

💼 ITI पास युवा भी पलायन को मजबूर: वादों के बावजूद नहीं मिली नौकरी

पलायन का दंश और किसानों की नाराजगी:

  • जमीन अधिग्रहण के वादे अधूरे: ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री स्थापना के समय स्थानीय युवाओं को नौकरी, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और चौतरफा विकास का भरोसा दिया गया था, जो आज तक अधूरा है।

  • दूसरे राज्यों का रुख: स्थानीय निवासी अरविंद और सुधीर कुमार यादव ने बताया कि गांव के कई युवाओं ने ITI व तकनीकी डिप्लोमा पूरा किया है, लेकिन रोजगार न मिलने के कारण वे आज भी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गुजरात में मजदूरी करने को विवश हैं।

  • बुनियादी सुविधाओं की कमी: ग्रामीणों ने यह भी शिकायत दर्ज कराई कि रोजगार के साथ-साथ क्षेत्र में बिजली, शिक्षा और किसानों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का अपेक्षित विकास नहीं किया गया है।

📍 ‘फैक्ट्री मधेपुरा में तो रिपोर्ट पटना में क्यों?’: प्रबंधन के रुख पर टिकी नजरें

स्थान और संवाद पर ग्रामीणों का सवाल:

  • पटना में कार्यक्रम पर आपत्ति: ग्रामीणों ने कड़ा ऐतराज जताया कि जब जमीन और संयंत्र मधेपुरा में है, तो आर्थिक उपलब्धियों की रिपोर्ट पटना में क्यों जारी की गई। यदि कार्यक्रम मधेपुरा में होता तो वे प्रबंधन के समक्ष अपनी जमीनी समस्याएं रख पाते।

  • आंदोलन की तैयारी: प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने बैठक कर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने का निर्णय लिया है।

  • प्रबंधन के जवाब का इंतजार: अब यह देखना बाकी है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार और उपेक्षा से जुड़े इन तीखे सवालों पर फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन क्या रुख अपनाता है।

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