नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही: 162 शव बरामद, 133 भारतीयों समेत 750 से अधिक लोग लापता; भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
काठमांडू (नेपाल): मध्य नेपाल के जिलों और तिब्बत सीमा के समीप अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों सहित 750 से अधिक लोग लापता हैं। पुलिस बुलेटिन के अनुसार 8 प्रभावित जिलों से अब तक 162 शव बरामद किए जा चुके हैं। बाढ़ के तेज बहाव में अनगिनत घर, मुख्य सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचा पूरी तरह बह गए हैं।
🌍 विदेशी पर्यटकों और मानसरोवर यात्रियों पर बड़ा संकट: 133 भारतीय लापता
पर्यटकों और विभिन्न देशों के नागरिकों की स्थिति:
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विदेशी नागरिकों की सूची: नेपाल टूरिस्ट बोर्ड के मुताबिक, लापता लोगों में 100 से अधिक भारतीय, 54 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 53 यूक्रेन के नागरिक शामिल हैं।
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मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्री: सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल के अनुसार, लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कम से कम 59 भारतीय तीर्थयात्री शामिल हैं। इनमें कोलकाता का 32 सदस्यीय समूह भी शामिल है।
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ईशा फाउंडेशन व अन्य दल: ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य इमिग्रेशन सेंटर के पास से लापता बताए जा रहे हैं। तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 अभी भी लापता हैं।
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सुरक्षा बलों के जवान लापता: नेपाल पुलिस, सेना के कई जवान और बिजली विभाग के कर्मचारी भी ड्यूटी के दौरान बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
📞 भारत सरकार का बड़ा कदम: पीएम मोदी ने दिया मदद का भरोसा, दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
राहत और समन्वय के प्रयास:
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प्रधानमंत्री मोदी का आश्वासन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाली समकक्ष से बात कर हरसंभव मानवीय और तकनीकी सहायता का भरोसा दिया है, जिसके तहत नई दिल्ली से राहत सामग्री की पहली खेप रवाना कर दी गई है।
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काठमांडू दूतावास हेल्पलाइन: भारतीय दूतावास ने आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं—
+977 985 131 6807और+977 970 910 7500। -
बीजिंग दूतावास नंबर: बीजिंग स्थित दूतावास ने व्हाट्सएप सहायता हेतु
0086 185 1428 4905जारी किया है। -
नेपाल टूरिस्ट बोर्ड हेल्पलाइन: आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री 1234, हॉटलाइन 1144 और पुलिस नंबर 9851289445 सक्रिय किए गए हैं।
⚠️ 200 किलोमीटर तक फैली तबाही, 12 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त
आपदा का दायरा और नुकसान:
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बाढ़ की शुरुआत: नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी और भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से त्रिशूली नदी में भीषण उफान आया।
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प्रभावित जिले: रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत राजधानी काठमांडू से 70 से 200 किमी तक का इलाका गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
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बुनियादी ढांचे को क्षति: कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक (जलविद्युत) प्रोजेक्ट्स क्षतिग्रस्त हो गए हैं और सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
🚚 8 ट्रकों में भेजी गई आपात राहत सामग्री, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट
राहत एवं बचाव अभियान की वर्तमान स्थिति:
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नेपाली सेना का ऑपरेशन: नेपाली सेना के 8 ट्रकों द्वारा रसुवा क्षेत्र में 8 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई है, जिसमें 500 कंबल, 500 सोलर लाइट, सोलर पैनल और स्लीपिंग बैग शामिल हैं।
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वैज्ञानिक विश्लेषण: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, भूकंप जैसी ऊर्जा असल में बड़े पैमाने पर हुए लैंडस्लाइड (चट्टानें खिसकने) और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट के कारण उत्पन्न हुई थी।
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वैश्विक प्रतिक्रिया: अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ ने अपने नागरिकों की खोजबीन के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया है।
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