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छिंदवाड़ा में भारी बारिश के मौसम में भी गहराया पेयजल संकट: 147 में से 96 तालाब सूखे, महीने में 15 दिन ही सप्लाई

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छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हो रही तेज बारिश के बीच प्रदेश के अधिकांश जिले अब भी पर्याप्त वर्षा के लिए तरस रहे हैं।nमौसम विभाग के अनुसार, राज्य के 55 जिलों में से केवल 16 जिलों में ही औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिनमें अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं। वहीं बाकी 39 जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे है। सबसे चिंताजनक स्थिति छिंदवाड़ा जिले की है, जहां सावन-भादों के चरम मानसून में भी जलस्रोत सूखे पड़े हैं और पेयजल आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है।

🚰 महीने में सिर्फ 15 दिन पानी की सप्लाई, बारिश के मौसम में भी टैंकरों का सहारा

जिले में पेयजल आपूर्ति की मौजूदा स्थिति:

  • एक दिन छोड़कर जलापूर्ति: छिंदवाड़ा शहर में वर्तमान में एक दिन के अंतराल (अल्टरनेट डे) पर ही नलों में पानी दिया जा रहा है, जिससे नागरिकों को महीने में केवल 15 दिन ही पानी मिल पा रहा है।

  • टैंकरों से सप्लाई: जिन वार्डों और कॉलोनियों में पाइपलाइन से पानी नहीं पहुंच पा रहा है, वहां बारिश के मौसम में भी नगर निगम द्वारा टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है।

  • आगामी संकट की आशंका: मानसून का अब मुश्किल से एक महीना शेष बचा है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो आगामी गर्मियों और सर्दियों में जिले को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

📊 147 में से 96 जलाशय अब भी खाली, 141 मिमी कम दर्ज हुई बारिश

वर्षा और जलाशयों के आधिकारिक आंकड़े:

  • वर्षा का अंतर: अधीक्षक भू-अभिलेख के आंकड़ों के अनुसार, छिंदवाड़ा की वार्षिक औसत वर्षा 1059 मिमी है, जबकि अब तक मात्र 619.7 मिमी बारिश हुई है (गत वर्ष इसी अवधि तक 760.2 मिमी बारिश हो चुकी थी)।

  • तालाबों की स्थिति: छिंदवाड़ा और नवगठित पांढुर्णा जिले के कुल 147 मध्यम व छोटे जलाशयों में से 96 बांध व तालाब पूरी तरह सूखे पड़े हैं।

  • जल भंडारण स्तर:

    • 100% भरे जलाशय: केवल 10

    • 75% भरे जलाशय: 5

    • 50% से अधिक भरे जलाशय: 10

    • 25% से अधिक भरे जलाशय: 26

🏛️ सांसद बंटी विवेक साहू ने ली बैठक, माचागोरा डैम से पानी लाने की कार्ययोजना के निर्देश

प्रशासनिक कदम और वैकल्पिक योजनाएं:

  • समीक्षा बैठक: पेयजल संकट की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सांसद बंटी विवेक साहू ने नगर निगम और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ आपात बैठक की।

  • माचागोरा डैम से जलापूर्ति: सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि माचागोरा डैम का पानी चंदनगांव वाटर फिल्टर प्लांट तक त्वरित रूप से पहुंचाने की विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए।

  • कन्हरगांव डैम संगम-2 योजना: मुख्य जलस्रोत कन्हरगांव डैम को संगम-2 परियोजना से जोड़ने और अन्य वैकल्पिक स्त्रोतों से भरने के लिए तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए गए।

  • ट्यूबवेल व कुओं की मरम्मत: शहर के बंद पड़े सरकारी नलकूपों (ट्यूबवेल) को चालू करने और पुराने कुओं की सफाई करवाकर वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है।

🗣️ ‘जल्द बनेगी स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था’: महापौर विक्रम आहाके

नगर निगम का पक्ष:

  • कन्हरगांव डैम खाली: नगर निगम महापौर विक्रम आहाके ने बताया कि पर्याप्त वर्षा न होने के कारण शहर को पानी देने वाला मुख्य कन्हरगांव डैम इस बार भर नहीं पाया है।

  • राहत के प्रयास: प्रभावित वार्डों में नियमित निगरानी रखी जा रही है और जहां दबाव कम है, वहां टैंकरों के जरिए राहत दी जा रही है। माचागोरा डैम से पानी लाने की तकनीकी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।

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