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नक्सल प्रभावित बूढ़ापहाड़ में AI से बदलेगी जिंदगी: हुनर से रोजगार 2.0 के तहत 110 युवाओं का रजिस्ट्रेशन

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पलामू (झारखंड): झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए ग्रामीणों के जीवन स्तर और आजीविका को बेहतर बनाने की एक अनूठी और ऐतिहासिक पहल शुरू की गई है।

पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के बेतला नेशनल पार्क में देश की पहली ऐसी ‘AI लैब’ तैयार की गई है, जो किसी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थापित है। इस परियोजना के लिए पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने ‘स्टार्टअप झारखंड’ संस्था के साथ एक आधिकारिक एमओयू (MoU) साइन किया है। इसके तहत तकनीकी विशेषज्ञ स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और छात्रों को खेती, व्यवसाय, शिक्षा और कंटेंट क्रिएशन में एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देंगे।

⛰️ ‘AI बिल्डर बूट कैंप’ की शुरुआत: बूढ़ापहाड़ और आदिवासी समुदाय पर विशेष फोकस

अभियान की रूपरेखा और लक्षित वर्ग:

  • अभियान का नाम: इस महत्वाकांक्षी पहल को ‘एआई बिल्डर बूट कैंप’ नाम दिया गया है, जिसकी औपचारिक शुरुआत 22 अगस्त 2026 से हो चुकी है।

  • लक्षित आबादी: प्रारंभिक चरण में स्कूल और कॉलेज के छात्रों को जोड़ा गया है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य बूढ़ापहाड़ और आसपास के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों व पूर्व नक्सलियों के बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

  • वीकेंड ट्रेनिंग सत्र: पीटीआर द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित ग्रामीणों को प्रत्येक शनिवार और रविवार को बेतला नेशनल पार्क स्थित लैब में लाकर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

🌾 वैज्ञानिक खेती से लेकर रील्स और इन्फ्लुएंसर बनने तक के सिखाए जा रहे गुर

प्रशिक्षण सामग्री और विशेषज्ञों की राय:

  • स्मार्ट कृषि प्रबंधन: पीटीआर क्षेत्र के करीब 207 गांवों की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है; एआई टूल्स के जरिए किसानों को मौसम का पूर्वानुमान, फसलों के रोग और उनके समय पर उपचार की वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी।

  • सोशल मीडिया व पढ़ाई में मदद: स्थानीय युवाओं को कंटेंट क्रिएशन, रील्स मेकिंग और डिजिटल इन्फ्लुएंसर बनने के तरीके सिखाए जा रहे हैं, जबकि छात्रों को पढ़ाई व रिसर्च में एआई टूल्स का उपयोग समझाया जा रहा है।

  • विशेषज्ञों का वक्तव्य:

    • माणिक कुमार (स्टार्टअप झारखंड): “आज के डिजिटल दौर में एआई रोजगार और खेती को आधुनिक बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है।”

    • मंगलेश रंजन (ट्रेनर): “स्थानीय युवा अपने छोटे कारोबार को ऑनलाइन बढ़ाने और नेटवर्किंग में इन टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल कर सकेंगे।”

🎯 युवाओं में जबरदस्त उत्साह, 110 से अधिक रजिस्ट्रेशन; ‘हुनर से रोजगार 2.0’ को मिली गति

युवाओं की प्रतिक्रिया और सामाजिक पुनरुद्धार:

  • उत्साहजनक भागीदारी: प्रशिक्षण के प्रति युवाओं में भारी आकर्षण देखा जा रहा है और अब तक 110 से अधिक प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन करा लिया है।

  • युवाओं की राय: स्थानीय युवा गुड्डू प्रसाद, दीपक कुमार और युवती निधि ने बताया कि एआई टूल्स फसलों की बीमारी पहचानने और करियर संवारने में मील का पत्थर साबित होंगे।

  • बूढ़ापहाड़ का बदलाव: दशकों तक माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहा बूढ़ापहाड़ अब मुख्यधारा में लौट चुका है। ‘हुनर से रोजगार अभियान 2.0’ के अंतर्गत यह एआई प्रशिक्षण पूर्व में हिंसा प्रभावित रहे इस पूरे क्षेत्र को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है।

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