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यूपी गैंगस्टर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, दो वकीलों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की एक बेहद तल्ख और अहम टिप्पणी सामने आई है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूपी गैंगस्टर एक्ट अपने आप में कोई स्वतंत्र अपराध नहीं बनाता है और यह निर्दोष व बेखबर नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला साबित हो सकता है। अदालत ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति को ‘गैंगस्टर’ करार देने के आधार पर उस पर मुकदमा चलाकर सजा नहीं दी जा सकती। शीर्ष अदालत ने ये गंभीर टिप्पणियां उत्तर प्रदेश के दो वकीलों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह रद्द करते हुए कीं।

🛡️ ‘कानून में बिना किसी ठोस अपराध के कोई सजा नहीं हो सकती’: जस्टिस पारदीवाला की बेंच

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कानूनी व्याख्या करते हुए कहा:

  • अपराध का अभाव: बेंच ने कहा कि कानूनी सिद्धांत के अनुसार बिना किसी अपराध के कोई सजा नहीं दी जा सकती। 1986 का यह अधिनियम कोई नया या अलग अपराध परिभाषित नहीं करता है।

  • केवल स्थिति की व्याख्या: यह कानून केवल धारा 2 की उप-धारा (b) और (c) के तहत उस व्यक्ति की स्थिति को ‘गैंग’ या ‘गैंगस्टर’ के रूप में परिभाषित करता है, जो किसी अपराध में शामिल रहा हो।

  • दंड विधान का नियम: जिस दंड विधान के तहत किसी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाता है, उसे स्पष्ट रूप से एक अपराध तय करना चाहिए। मौजूदा कानून में समीक्षा के दौरान ऐसा कोई स्पष्ट अपराध बनता हुआ नहीं दिखता।

📜 फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ बार एसोसिएशन चुनाव विवाद से जुड़ा है पूरा मामला

मुकदमे की पृष्ठभूमि और वकीलों की याचिका का ब्योरा:

  • मामले की जड़: यह पूरा विवाद दो वकीलों—शिव प्रताप सिंह और हिमांशु श्रीवास्तव से जुड़ा हुआ है।

  • विवाद की वजह: फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ में बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर हुए आपसी विवाद के बाद पुलिस ने दोनों वकीलों के खिलाफ यूपी गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर दी थी।

  • हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब इस आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया, तब दोनों वकीलों ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें बड़ी राहत मिली।

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