Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Police Action Chhindwara: सीसीटीवी फुटेज की मदद से तीन शातिर लुटेरे गिरफ्तार, 43 हजार रुपये बरामद Malva Nritya Mahotsav 2026: सेमी-क्लासिकल डांस में चमकी सौम्या, मिला प्रतिष्ठित 'मालवा नृत्य महोत्सव... STF Action in Bhopal: बौद्ध धर्म प्रचार के नाम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने का मामला, 70 संदिग्ध चिन्हित Municipal Corporation Sagar: एमआईसी के प्रस्तावों को लंबित रखने का आरोप, आयुक्त के कार्यप्रणाली के ख... Ramleela Chhindwara 2026: छोटी बाजार में सजी भगवान राम की लीला, कोरोना काल में भी नहीं रुका था मंचन ... Congress Protest Bhopal: चुनाव आयोग के बाहर कांग्रेस नेताओं का हंगामा, पूरे प्रदेश में आंदोलन का ऐला... Madhya Pradesh Politics: पटवारी बोले- 'जब प्रदेश के पटवारी ही सरकार की नहीं सुनते, तो सरकार खटारा है... Delhi Building Accident: नई बनी इमारत ढहने से हड़कंप, राहत और बचाव कार्य जारी, घायलों को अस्पताल में... Coal India PME Update: कोलकर्मियों की हर साल होगी स्वास्थ्य जांच? प्रस्तावित नई व्यवस्था के खिलाफ मु... Muslim Personal Law: नाबालिग बेटी की कस्टडी मामले में हाईकोर्ट का निर्देश, बच्चे का कल्याण सबसे सर्व...

सज्जन कुमार की मौत पर मनजीत सिंह जीके का बड़ा बयान: 1984 सिख कत्लेआम का सबसे बड़ा मगरमच्छ था, फांसी होती तो मिलता सुकून

14

1984 के सिख विरोधी दंगों (Sikh Genocide) के मुख्य दोषियों में शामिल पूर्व कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार के निधन को लेकर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

मनजीत सिंह जीके ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नवंबर 1984 में हुए निर्दोष सिखों के नरसंहार का सबसे बड़ा मगरमच्छ सज्जन कुमार ही था। उन्होंने कहा कि धर्मराज शास्त्री, एच.के.एल. भगत और अर्जुन दास जैसे चेहरों की प्राकृतिक मौत हो गई और वे जेल नहीं जा सके, लेकिन सिख कौम ने सज्जन कुमार के खिलाफ 40 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। आज वह उन सभी वकीलों, साहसी गवाहों और पीड़ित परिवारों को बधाई और शाबाशी देते हैं जिन्होंने न्याय की इस लंबी जंग को मजबूती से लड़ा।

⏳ 40 साल तक मिटाए गए सबूत, गवाहों को धमकाया गया; फिर भी पहुंचा जेल

मनजीत सिंह जीके ने कानूनी संघर्ष की कठिनाइयों को उजागर किया:

  • सबूत मिटाने के आरोप: उन्होंने कहा कि 40 वर्षों के दौरान तत्कालीन सरकारों के संरक्षण में मामलों से जुड़े अहम सबूत मिटा दिए गए थे।

  • दहशत का माहौल: गवाहों को डराया-धमकाया गया और मुकदमों को भटकाने की पूरी कोशिशें की गईं।

  • कौम का संघर्ष: इसके बावजूद सिख समुदाय और वकीलों ने हार नहीं मानी और एक बेहद लंबी व ऐतिहासिक अदालती लड़ाई के बाद सज्जन कुमार को जेल की सलाखों के पीछे भिजवाया, जहां वह पिछले 6 वर्षों से कैद था।

💔 1984 की बर्बरता रूह कंपाने वाली थी, फांसी की सजा न मिलने का मलाल

मनजीत सिंह ने दंगों के दौरान पीड़ितों पर हुए अमानवीय अत्याचारों का जिक्र किया:

  • क्रूरता की हदें: उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान 14-15 साल के मासूम बच्चों, उनके पिताओं और परिजनों को बेरहमी से कत्ल किया गया तथा महिलाओं व बच्चियों के साथ अमानवीय अत्याचार हुए।

  • संस्कार तक नहीं करने दिया: पीड़ितों को मृतकों का अंतिम संस्कार तक करने से रोका गया। असहाय महिलाओं और बच्चियों ने घरों का फर्नीचर तोड़कर अधजले शवों को किसी तरह जलाने की बेबस कोशिश की थी।

  • सजा-ए-मौत की मांग: जीके ने कहा कि जिस दिन सज्जन कुमार को अदालत ने दोषी ठहराया था, उन्हें उम्मीद थी कि उसे फांसी की सजा मिलेगी। कौम लगातार उसे फांसी दिलाने की मांग कर रही थी, लेकिन उम्रकैद की सजा दी गई।

📞 15 हजार केसों की जगह दर्ज हुए केवल 287 मामले, पुलिस व तंत्र की भूमिका पर सवाल

मनजीत सिंह जीके ने उस दौर के प्रशासनिक और पुलिस तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए:

  • पुलिस की निष्क्रियता: उन्होंने सवाल किया कि उस समय आपातकालीन 100 नंबर (डिस्ट्रिक्ट कॉल) पर सैकड़ों फोन जाने के बावजूद पुलिस और सरकारी मशीनरी मूकदर्शक क्यों बनी रही?

  • कम मामले दर्ज होना: उन्होंने कहा कि जहां कम से कम 15,000 मामले दर्ज होने चाहिए थे, वहां महज 287 केस दर्ज किए गए, वह भी 11 आयोगों के गठन और 10 साल के लंबे अंतराल के बाद।

  • स्टिंग और गवाही: जगदीश टाइटलर जैसे आरोपी जो खुद को पाक-साफ बताते थे, उनके खिलाफ स्टिंग ऑपरेशनों और पुख्ता गवाहियों के जरिए सिखों ने कानूनी शिकंजा कसा।

🕊️ ‘मरने पर कोई खुशी नहीं, लेकिन 40 साल की लड़ाई के बाद जेल भेजने का संतोष’

मनजीत सिंह जीके ने गुरुओं की सीख का हवाला देते हुए अपनी बात समाप्त की:

  • सिख संस्कार: उन्होंने कहा कि गुरु साहिबान हमें सिखाते हैं कि किसी की मृत्यु पर खुशी नहीं मनानी चाहिए, इसलिए हमें भी कोई खुशी नहीं है।

  • अधूरा न्याय: मनजीत सिंह के अनुसार, सिखों के जख्मों पर असली मरहम तब लगता जब सज्जन कुमार को उसके गुनाहों के लिए फांसी के फंदे पर लटकाया जाता।

  • ऐतिहासिक जीत: उन्होंने अंत में कहा कि ईश्वर के न्याय के अनुसार जो लिखा था, उसकी मौत वैसे ही हुई; लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि 40 साल के कड़े संघर्ष के बाद कौम उसे जेल पहुंचाने में सफल रही और वह पिछले 6 साल जेल में काटने को मजबूर हुआ।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.