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DJB सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट घोटाला: कोर्ट में सत्येंद्र जैन ने खुद रखीं दलीलें, रिमांड और न्यायिक हिरासत पर फैसला सुरक्षित

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नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले और अनियमितताओं के मामले में एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) द्वारा गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी (AAP) नेता व पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन सहित छह आरोपियों को बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन ने अपनी बात खुद रखी। उन्होंने अदालत को बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण इसलिए किया जाना था ताकि अशोधित गंदा पानी सीधे यमुना नदी में न गिरे और नदी को स्वच्छ बनाया जा सके, जो सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल था।

⚙️ तकनीकी फैसलों और ₹1,546 करोड़ के टेंडर पर सत्येंद्र जैन का स्पष्टीकरण

सत्येंद्र जैन ने अदालत के समक्ष टेंडर और तकनीकी पहलुओं से जुड़ी परिस्थितियों को विस्तार से समझाया:

  • क्षमता विस्तार का निर्णय: नए एसटीपी के निर्माण में अधिक समय लगने के कारण मौजूदा प्लांट्स की शोधन क्षमता 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का नीतिगत फैसला लिया गया था।

  • अधिकारियों पर निर्भरता: जैन ने कहा कि भले ही उनके पास आठ मंत्रालयों का प्रभार था, लेकिन वे तकनीकी विशेषज्ञ नहीं थे और तकनीकी पहलुओं के चयन के लिए विभागीय अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था।

  • टेंडर का प्रारूप: शुरुआती चरण में ₹1,546 करोड़ की अनुमानित लागत से 300 MGD क्षमता का लक्ष्य तय किया गया था और ₹5 करोड़ प्रति MGD की दर से चार अलग-अलग पैकेजों में टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन संबंधित अंतिम फाइल उन तक कभी नहीं पहुंची।

  • आरोपी बनाने की दलील: आप नेता ने आरोप लगाया कि 7 अगस्त को उन्हें बुलाकर ऐसे तकनीकी विषयों पर पूछताछ की गई जिनकी उन्हें सीधी जानकारी नहीं थी, क्योंकि मुख्य उद्देश्य उन्हें केवल ‘आरोपी नंबर 1’ बनाना था।

❓ ‘मैं जेल में था तो

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