मुंबई: देश के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े कारोबारी घरानों में से एक, टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी ‘टाटा सन्स’ (Tata Sons) के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से हटने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे अपना मौजूदा कार्यकाल निष्ठापूर्वक पूर्ण करेंगे, किंतु भविष्य में दोबारा इस पद की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेंगे। इस महत्वपूर्ण घोषणा का सीधा और त्वरित प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। खबर सार्वजनिक होते ही टाटा समूह की कई दिग्गज सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गए।
📉 TCS 5% टूटा, टाइटन, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर में भारी बिकवाली का दबाव
जैसे ही दलाल स्ट्रीट पर चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की सूचना फैली, निवेशकों ने टाटा समूह के शेयरों में चौतरफा बिकवाली शुरू कर दी।
प्रातः काल में भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर लगभग 5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ ₹2,336.90 के स्तर पर आ गए। इसके अतिरिक्त टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयरों में 1.6 प्रतिशत, जबकि टाइटन कंपनी के शेयर में 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बिकवाली का यह रुख यहीं नहीं रुका; टाटा स्टील 1.13 प्रतिशत तथा इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) 1.04 प्रतिशत तक फिसल गए। वहीं टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में भी 1 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई।
⚔️ नोएल टाटा से मतभेद और 18 अगस्त की AGM; जानिए इस्तीफे की मुख्य वजह
चेयरमैन द्वारा अचानक उठाए गए इस कदम की पटकथा कुछ माह पूर्व ही लिखी जानी शुरू हो गई थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चालू वर्ष के फरवरी माह में टाटा सन्स के बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया था। इसका मुख्य कारण टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा इस प्रस्ताव पर दर्ज कराई गई कड़ी आपत्ति को माना जा रहा है। आगामी 18 अगस्त को टाटा सन्स की वार्षिक आम बैठक (AGM) प्रस्तावित है, जिसमें शेयरधारकों द्वारा उनकी पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर मतदान होना था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार चंद्रशेखरन ने अपने करीबियों को पूर्व में ही संकेत दे दिए थे कि वे एजीएम से पूर्व ही पद से हटने का मन बना चुके हैं।
💼 1987 में TCS से शुरू किया सफर, 2017 में संभाली थी टाटा सन्स की कमान
एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ व्यावसायिक संबंध अत्यंत दीर्घकालिक और ऐतिहासिक रहा है।
उन्होंने वर्ष 1987 में एक युवा पेशेवर के रूप में टाटा ग्रुप में अपने करियर का शुभारंभ किया था। अपनी प्रशासनिक क्षमता और दूरदर्शिता के बल पर वे वर्ष 2009 में आईटी दिग्गज टीसीएस (TCS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद पर पहुंचे, जहां उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किए। इसके उपरांत, वर्ष 2017 में उन्हें टाटा समूह की शीर्ष संस्था ‘टाटा सन्स’ के चेयरमैन का पदभार सौंपा गया था। अब उनके दोबारा इस पद पर न रहने के फैसले को समूह के रणनीतिक नेतृत्व में एक बड़े युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
📊 कच्चे तेल की कीमतों और लीडरशिप संकट से सेंसेक्स-निफ्टी भी टूटे
टाटा समूह की कंपनियों में आई भारी गिरावट के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी नकारात्मक माहौल बना रहा।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। कारोबार के दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) 541.12 अंक (0.69%) गिरकर 77,613.13 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 168.20 अंक (0.69%) की टूट के साथ 24,303.50 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। कॉर्पोरेट नेतृत्व में बदलाव और वैश्विक संकेतों ने संयुक्त रूप से निवेशकों की संपत्ति को प्रभावित किया है।
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