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यूपी में सियासी घमासान: “सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है”— मायावती और बृजेश पाठक का अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार

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लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों से पूर्व राजनीति में जातीय समीकरणों और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सियासी बयानबाजी तीव्र हो गई है।

उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बृजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए परिवारवाद, ब्राह्मण समाज और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी सपा की राजनीतिक कार्यशैली को आड़े हाथों लिया है। मायावती ने सोशल मीडिया पर सपा को “गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी” करार दिया। दोनों ही प्रमुख नेताओं के निशाने पर सपा की सामाजिक और राजनीतिक गोलबंदी की रणनीति रही।

🏛️ “जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा”: बृजेश पाठक ने लोहिया के सिद्धांतों का दिया हवाला

अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का उत्तर विचारों से दिया जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत कटुता और असत्य आरोपों से।

उन्होंने प्रख्यात समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का संदर्भ देते हुए सपा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का संगीन आरोप लगाया। पाठक ने कहा कि लोहिया परिवारवाद के प्रबल विरोधी थे और उनका स्पष्ट सिद्धांत था कि “जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा।” उन्होंने तंज कसा कि आज लोहिया के नाम पर राजनीति करने वालों ने ही उनके आदर्शों का सबसे पहले परित्याग कर दिया है। यदि लोहिया आज जीवित होते, तो परिवार को सत्ता दिलाने की इस परिपाटी को कभी स्वीकार न करते।

🚩 “अखिलेश रच रहे हैं ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का स्वांग”: डिप्टी सीएम का पलटवार

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर ब्राह्मण समाज को लेकर भी कड़ा हमला किया।

उन्होंने कहा कि अखिलेश आज स्वयं को ब्राह्मण समाज का शुभचिंतक बताने का ढोंग कर रहे हैं, किंतु पत्रकारों से जाति पूछकर की गई उनकी कथित अपमानजनक टिप्पणियों को जनता आज भी नहीं भूली है। पाठक ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति “राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय” के मूल मंत्र पर आधारित है, जबकि विपक्षी दल सत्ता को मात्र एक परिवार तक सीमित रखने का प्रयास करते हैं। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, किंतु तथ्यों का जवाब सदैव तथ्यों से दिया जाना चाहिए।

🐘 “सपा गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी”: बीएसपी सुप्रीमो मायावती का करारा हमला

उधर, बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा कर समाजवादी पार्टी की नीति पर गंभीर सवाल उठाए।

मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर चलने वाली एकमात्र सर्वसमाज-हितैषी अंबेडकरवादी पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि यूपी में बीएसपी की सरकारें इसी विचार के आधार पर संचालित हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ सिद्धि के लिए गिरगिट की भांति रंग बदलती रहती है।

🎯 “पीडीए में ‘P’ का अर्थ ‘पिछड़ा’ से बदलकर ‘पंडित’ कर दिया”: मायावती ने बताया सपा का छल

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने सपा के बहुचर्चित ‘पीडीए’ (PDA) फॉर्मूले को भी सीधे निशाने पर लिया।

उन्होंने कहा कि सपा पूर्व में पीडीए में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताकर प्रचारित करती थी, परंतु अब अपर कास्ट (विशेषकर ब्राह्मण समाज) के बीएसपी से जुड़ने और उम्मीदवारों के चयन से बौखलाकर ‘P’ का अर्थ पंडित बताने लगी है। मायावती ने इसे सपा का राजनीतिक छल करार देते हुए कहा कि इस प्रकार के छलावे से किसी व्यक्ति विशेष को क्षणिक लाभ तो मिल सकता है, किंतु इससे संपूर्ण समाज का कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने सर्वसमाज से ऐसी जातिवादी राजनीति से सतर्क रहने की अपील की।

🔮 2027 के रण से पहले यूपी में सामाजिक समीकरण साधने की होड़

एक ही राजनीतिक घटनाक्रम पर तीनों प्रमुख दलों (बीजेपी, बीएसपी, सपा) की अलग-अलग रणनीतिक लाइनें स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही हैं।

जहाँ बृजेश पाठक के बयानों में परिवारवाद बनाम बीजेपी की अंत्योदय विचारधारा का मुद्दा सर्वोपरि रहा, वहीं मायावती ने पीडीए के विरोधाभास और बीएसपी के सर्वजन आधार को रेखांकित किया। दोनों ही नेताओं के हमले सपा के उस विस्तारवादी एजेंडे पर केंद्रित हैं, जिसके माध्यम से वह पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और अब प्रबुद्ध/ब्राह्मण मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव पूर्व शुरू हुई यह तीखी जुबानी जंग आने वाले दिनों में और अधिक उग्र होने के संकेत दे रही है।

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