Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Iran-Israel War Impact: ईरान युद्ध के कारण बढ़ सकते हैं पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के दाम; भारतीय... मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा फरमान: "मुसलमानों के लिए इस्लामी उत्तराधिकार कानून अनिवार्य"; संपत्ति... विकसित भारत 2047: हरियाणा बनेगा देश का 'ग्रोथ इंजन'! उद्योग और युवाओं के कौशल पर सरकार का बड़ा दांव;... दिल्ली-देहरादून हाईवे पर 'आपत्तिजनक नारा' लिखना पड़ा भारी! दो युवतियों समेत 3 गिरफ्तार; माहौल बिगाड़ने... सावधान! दिल्ली में 48 घंटे बाद बरसेगा पानी, यूपी-राजस्थान में 'तूफान' जैसी हवाओं का अलर्ट; IMD ने पह... आगरा में 'जहरीली गैस' का तांडव! कोल्ड स्टोरेज से रिसाव के बाद मची भगदड़, जान बचाने के लिए खेतों की त... Bus Fire News: जैसलमेर से अहमदाबाद जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, एक यात्री झुलसा; खिड़कियों से क... कश्मीर में VIP सुरक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! फारूक अब्दुल्ला पर हमले के बाद हिला प्रशासन; अब बुलेटप... ईरान की 'हिट लिस्ट' में Google, Apple और Microsoft? अब टेक कंपनियों को तबाह करेगा तेहरान; पूरी दुनिय... दिल्ली में 'Zero' बिजली बिल वालों की शामत! खाली पड़े घरों की सब्सिडी छीनने की तैयारी; क्या आपका भी बं...

रूस से सस्ता तेल खरीदना हुआ कम? खाड़ी देशों की ओर फिर मुड़ा भारत, समझें मोदी सरकार का नया मास्टरप्लान

18

अमेरिकी राष्ट्रपति के रूसी ऑयल टैरिफ के बाद भारत ने अपने ऑयल गेम को पूरी तरह से बदल दिया है. अगर इस बात को यूं कहें कि भारत का रूसी तेल से ब्रेकअप और खाड़ी देशों के तेल के पैचअप हो गया है, तो गलत नहीं होगा. वास्तव में रूसी तेल की सप्लाई में लगातार कमी देखने को मिल रही है. वहीं खाड़ी देशों के कच्चे तेल की सप्लाई में इजाफा देखने को मिल रहा है. भारत के इस ऑयल गेम से पूरी दुनिया चौंक गई है. वहीं दूसरी ओर भारत ने हाल के दिनों में कुछ नए देशों के साथ ऑयल सप्लाई की डील की है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आंकड़े किस तरह की कहानी बयां कर रहे हैं?

कैसे बढ़ रही खाड़ी देशों की सप्लाई?

भारत ने कच्चे तेल के आयात की रणनीति में बदलाव करते हुए कम जोखिम वाली सप्लाई पर जोर दिया है. इसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि सीमित मात्रा में रूस से सप्लाई भी बनी हुई है. विश्लेषण फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार जनवरी के पहले तीन हफ्तों में रूसी कच्चे तेल का आयात गिरकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो पिछले महीने औसतन 12.1 लाख बैरल प्रतिदिन और मिड 2025 में 20 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा अधिक था.

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 90 प्रतिशत आयात पर निर्भर है. केप्लर के आंकड़ों के अनुसार इराक अब रूस के बराबर मात्रा में सप्लाई कर रहा है, जबकि दिसंबर 2025 में यह औसतन 9,04,000 बैरल प्रतिदिन था. सऊदी अरब से आने वाली मात्रा भी इस महीने बढ़कर 9,24,000 बैरल प्रतिदिन हो गई है, जो दिसंबर में 7,10,000 बैरल प्रतिदिन और अप्रैल 2025 में 5,39,000 बैरल प्रतिदिन थी.

2022 ने रूस ने छोड़ा था इराक को पीछे

रूस 2022 में इराक को पीछे छोड़कर भारत का टॉप सप्लायर बन गया था, जब भारतीय रिफाइनरी ने भारी छूट वाले रूसी तेल को खरीदने के लिए तेजी दिखाई थी. दरअसल यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण के बाद यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था. केप्लर के शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि जनवरी 2026 में भारत की कच्चे तेल की खरीद कम जोखिम वाली और अधिक विश्वसनीय आपूर्ति की ओर एक स्पष्ट बदलाव दिखाती है. इसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि सीमित मात्रा में रूस का प्रवाह भी बना हुआ है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.