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जुगाड़ू वाहन बन रहे हादसों का कारण, मूकदर्शक बनी ट्रैफिक पुलिस

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मोगा/निहाल सिंह वाला : समय-समय पर होते बड़े हादसों पर नकेल कसने के लिए बेशक सरकार द्वारा ट्रैफिक नियमों को काबू करने के लिए अलग-अलग सख्त कानून बनाए जाते हैं, लेकिन इन कानूनों की पालना न करने के चलते बड़े हादसे जन्म ले रहे हैं तथा प्रशासनिक अधिकारियों के नाक के नीचे लोगों द्वारा कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

संबंधित अधिकारियों द्वारा इनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के चलते इन गैर जिम्मेवार नागरिकों के हौसले बढ़ चुके हैं, दूसरी तरफ कुछ कानून की पालना करने वालों को ऐसा लगने लग पड़ा है कि वह बेकार में ही अपना समय बर्बाद करने में लगे हुए हैं, उनके दिलों में भी कानून के खौफ को नजरंदाज करके मनमर्जी से काम करने की भावना पैदा हो रही है।

सरकारी खजाने को चूना

हलके में जहां जुगाड़ू वाहन ट्रांसपोर्ट अधिकारियों को सरेआम तुच्छ समझ रहे हैं। ऐसे जुगाड़ू वाहन सड़कों पर सरेआम दौड़ते देखे जा सकते हैं, जिनका ट्रांसपोर्ट विभाग में शायद ही कोई रिकॉर्ड भी नहीं है, यह जुगाड़ू वाहन जहां सरकार को वाहन की रजिस्ट्रेशन न होने के कारण लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कमर्शियल वाहनों के मालिक जो कि टैक्स देकर गाड़ियां चलाते हैं, उनके कारोबार के लिए भी घाटे का कारण सिद्ध हो रहे हैं।

स्कूली विद्यार्थी भी उड़ा रहे हैं नियमों की धज्जियां

स्कूल जाने वाले नाबालिग विद्यार्थी भी मोटरसाइकिल पर 4-4 की गिनती में सवार होकर ट्रांसपोर्ट नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इन विद्यार्थियों का विभाग द्वारा लाइसैंस भी नहीं बना हुआ। इसके अलावा ओवरलोड वाहन तथा बसों की छतों पर बैठकर सफर करते लोग आम देखने को मिल सकते हैं।

जुगाड़ू वाहनों की बढ़ रही गिनती

बड़ी गिनती में जुगाड़ू वाहन नजर आने लग पड़े हैं, जो कि प्रशासनिक अधिकारियों की आंखों में धूल डाल रहे हैं तथा हैवी तथा कामर्शियल वाहनों की रजिस्ट्रेशन के सामान की ढोआ-ढुआई करते हैं, पहले तो इन जुगाड़ू वाहनों की गांवों में ही प्रयोग की जाती थी तथा लोग खेतों में हरा चारा लाने के लिए इनका प्रयोग मोटरसाइकिल के पीछे रेहड़ी डालकर करते थे लेकिन अब इन वाहनों का प्रयोग शहरों में भी हो रहा है, जो कि सामान ढोने के लिए कर रहे हैं। ओवरलोड तथा भारी सामान ढोते यह आम ही देखे जा सकते हैं।

हादसों को दे रहे न्यौता

मोटरसाइकिल या मोपेड जिनके इंजन सिर्फ 2 व्यक्तियों के वजन उठाने के लिए होते हैं, पीछे सामान लादने का जुगाड़ लगाकर इन पर वजन लादकर ढोते समय यदि इंजन में खराबी आ जाए, तो वजन कारण बेकाबू हो जाए, तो ऐसे वाहन सड़क पर चलते समय जहां अपने आप हादसे का शिकार हो सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़क के चलते कुछ और वाहनों को भी हादसे का शिकार बना सकते हैं।

मूकदर्शक बनी ट्रैफिक पुलिस

ट्रैफिक पुलिस द्वारा ज्यादातर दोपहिया वाहन चालकों के चालान काटने की तरफ ही जोर दिया जा रहा है, जबकि शहर में सैंकड़ों की गिनती में लोगों द्वारा मोटरसाइकिल, ऑटो, पीटर रेहड़े तथा अन्य कई तरह के वाहनों को मोडीफाई करके बाजार में सरेआम घुमाया जा रहा है, जो ट्रैफिक पुलिस को दिखाई नहीं दे रहे या फिर देखकर अनदेखा किया जा रहा है। चौक में खड़े पुलिसकर्मियों के नाक के नीचे यह वाहन आम गुजरते देखे जा सकते हैं तथा इन लोगों को पुलिस का डर न होने के कारण आए दिन इन जुगाड़ू वाहनों की गिनती में बढ़ोतरी हो रही है।

यदि जगह-जगह पर लगे नाकों पर तैनात पुलिस मुलाजिम इन जुगाड़ू वाहनों की तीखी नजर रखें तथा इन पर काबू पाना शुरू कर दें, तो जहां सरकार को लग रहा चूना बंद हो सकता है, वहीं इन जुगाड़ू वाहनों से और वाहन चालक सुरक्षित हो सकते हैं।

मिट्टी ढोने वाली ट्रालीयां बन रही हादसों का कारण

गांवों तथा शहरों में ओवरलोड मिट्टी की ट्रालियां जिन पर ऊंची आवाज में डैक लगाए जाते हैं, वह भी हादसों का कारण बन रही हैं। इसके अलावा ट्रैक्टरों पर ऊंची आवाज में चलते गाने तथा ट्रैक्टरों के पीछे लगाई तेज लाइटें भी हादसों को नयौता दे रही हैं।

क्या कहना है कानूनी माहिरों का

इस संबंधी अलग-अलग कानूनी माहिरों पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट कमलदीप सिंह दीदारेवाला से बातचीत करने पर उनका कहना था कि देश में आए दिन हो रहे बड़े सड़क हादसों के बाद देश की माननीय अदालतों द्वारा सरकारों को दिशा-निर्देश जारी किए जाते हें, लेकिन सरकारों तथा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इन आदेशों को लागू न करने के कारण कीमती जानें हादसों की भेंट चढ़ रही हैं। उन्होंने जहां अधिकारियों को कानून को सख्ती से लागू करने की अपील की, वहीं देश के नागरिकों को भी अपने फर्जों पर पहरा देने की अपील की।

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