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इंदौर में ‘AI वॉयस क्लोनिंग’ का शिकार हुई टीचर: फोन पर सुनाई दी भाई की आवाज, एक क्लिक और पूरा बैंक खाता साफ!

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इंदौर में साइबर क्राइम का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एआई वॉयस मॉड्यूलेशन तकनीक का इस्तेमाल कर ठगों ने एक स्कूल शिक्षिका से 97,500 की ठगी कर ली. यह मध्य प्रदेश में एआई तकनीक के जरिए की गई ठगी का पहला केस माना जा रहा है. घटना लसूड़िया थाना क्षेत्र की है, जिसके बाद पुलिस और साइबर सेल सतर्क हो गई है.

पीड़िता इंदौर में रहने वाली एक स्कूल शिक्षिका हैं. पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि उनका एक चचेरा भाई उत्तर प्रदेश पुलिस की इमरजेंसी डायल सेवा में तैनात है. शिक्षिका की अपने भाई से लगभग दो साल पहले आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी. इसी बात का फायदा ठगों ने उठाया. पीड़िता के मुताबिक 6 जनवरी 2026 की रात वह अपने परिवार के साथ घर पर खाना खा रही थीं, तभी उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया.

भाई के जैसी लग रही थी आवाज

कॉल करने वाले नंबर के आखिरी अंक उनके चचेरे भाई के नंबर से काफी मिलते-जुलते थे. फोन उठाते ही सामने से आवाज आई, जो बिल्कुल उनके भाई जैसी लग रही थी. कॉल करने वाले ने खुद को उनका भाई बताया और घबराई हुई आवाज में कहा कि उसके एक दोस्त को अचानक दिल का दौरा पड़ा है और उसे इंदौर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां तुरंत ऑपरेशन के लिए पैसों की जरूरत है. विश्वास दिलाने के लिए ठग ने जल्दबाजी दिखाई और क्यूआर कोड भेजकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा.

97 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए

ऐसे में भाई की आवाज पहचानकर शिक्षिका किसी तरह के शक में नहीं पड़ीं और बताए गए क्यूआर कोड के जरिए 97 हजार 500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए. कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने भाई के असली नंबर पर कॉल किया, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद शिक्षिका ने लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने एआई वॉयस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर भाई की आवाज की नकल की थी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक गंभीर और नया तरीका है, जिससे आम लोग आसानी से ठगी का शिकार हो सकते हैं. साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी इमरजेंसी कॉल या पैसे की मांग पर तुरंत जांच करें और जल्दबाजी में कोई लेन-देन न करें.

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