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फिरौती की घटनाओं में 40 प्रतिशत कमी, 9 बड़ी साजिशें नाकाम, पुलिस ने संगठित अपराधियों के विदेशी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

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चंडीगढ़: हरियाणा में संगठित अपराध और फिरौती से जुड़े मामलों पर कड़े प्रहार के परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में फिरौती मांगने की घटनाओं में 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, पुलिस ने पिछले वर्ष 9 टारगेटेड मर्डर की बड़ी साजिशों को भी समय रहते विफल किया, जिससे अपराधियों के हौसले कमजोर पड़े हैं और जनता में भरोसा बढ़ा है|

पुलिस मुख्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा

यह जानकारी पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में साझा की गई। बैठक की शुरुआत में डीजीपी सिंघल ने राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों और उनके विदेशी नेटवर्क के खतरों को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रदेश में डर और दहशत फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

आतंक फैलाने वालों पर सबसे सख्त कार्रवाई

सिंघल ने जोर देकर कहा कि ऐसे लोग जो जनता में भय का वातावरण पैदा करते हैं, चाहे वे कहीं भी छिपे हों, उन्हें आतंकवादियों की श्रेणी में रखा जाएगा और कानून के अंतर्गत उन पर सबसे कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध का नेटवर्क तभी टूट सकेगा जब अपराधियों की पूरी संरचना का विश्लेषण करके उनके वास्तविक स्रोतों पर प्रहार किया जाएगा।

एसटीएफ की प्रेजेंटेशन और गैंग नेटवर्क का खुलासा

बैठक के दौरान आईजी एसटीएफ सतीश बालन ने पावर-प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से संगठित अपराध के वर्तमान ढांचे और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कई गैंगस्टर विदेशों में बैठकर सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम के जरिये अपने पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं। वर्चुअल नंबरों और फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल के माध्यम से वे अपने गिरोह के सदस्यों को निर्देश देते हैं और नई भर्ती के प्रयास करते हैं।

विदेशों में छिपे अपराधियों पर पैनी नजर

श्री बालन ने यह भी बताया कि एसटीएफ ऐसे अपराधियों पर लगातार निगरानी रख रही है और उन्हें विदेशों से डिपोर्ट करवाने के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय कर रही है। डीजीपी सिंघल ने इस पर जोर दिया कि कोई भी देश अपने यहां अपराधियों को पनाह देना नहीं चाहता, इसलिए हरियाणा पुलिस को विदेशी एजेंसियों से और अधिक मजबूत तालमेल बनाना होगा।

युवाओं पर गैंगस्टरों की पकड़ बढ़ना चिंता का विषय

बैठक में यह चिंता भी व्यक्त की गई कि सोशल मीडिया के तेजी से प्रसार के चलते कई युवा वर्ग अपराधियों के संपर्क में आ रहे हैं। गैंगस्टर युवाओं को लालच देकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं—पहले छोटे-मोटे काम करवाए जाते हैं, फिर धीरे-धीरे उन्हें गंभीर अपराधों में धकेल दिया जाता है, जबकि गैंग के सरगना खुद सुरक्षित स्थानों पर बैठे रहते हैं।

जागरूकता और रोकथाम पर विशेष जोर

इस बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए अधिकारियों ने सुझाव दिया कि तकनीकी निगरानी के साथ-साथ युवाओं के लिए जागरूकता और काउंसलिंग कार्यक्रमों को भी बढ़ाया जाए। साथ ही ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाए जहां अपराधी नेटवर्क युवाओं को अधिक प्रभावित कर रहा है, ताकि जड़ स्तर पर रोकथाम की जा सके।

अपराध की जड़ों पर प्रहार का आह्वान

बैठक का समापन डीजीपी सिंघल के इस निर्देश के साथ हुआ कि संगठित अपराध के खिलाफ अभियान को तेज और निरंतर बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों की पूरी रचना और उनके आर्थिक ढांचे को ध्वस्त करने तक जारी रहनी चाहिए।

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