राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी: राज्य निर्वाचन आयुक्त ने घोषित किया कार्यक्रम, आचार संहिता लागू
जयपुर (राजस्थान): राजस्थान में स्थानीय स्वशासन एवं नगर निकाय चुनावों की बहुप्रतीक्षित अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने प्रेस वार्ता के माध्यम से चुनाव कार्यक्रम और व्यवस्थाओं की औपचारिक जानकारी साझा की।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रदेश के संबंधित निकाय क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो गई है। विस्तृत कार्यक्रम और दिशा-निर्देशों की पुष्टि के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन किया जा सकता है।
📊 निकाय चुनाव के प्रमुख आंकड़े और मतदाता सहभागिता
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित व्यवस्था के अनुसार चुनावी परिदृश्य इस प्रकार है:
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निकायों का दायरा: प्रदेश भर के 309 नगर निकायों और 10 नगर निगमों के अंतर्गत आने वाले वार्डों में चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
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वार्ड व मतदाता: प्रदेश के 10,245 वार्डों में कुल 1.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
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सर्वाधिक मतदाता: राजधानी जयपुर नगर निगम क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक दर्ज की गई है, जहाँ 24 लाख से अधिक पंजीकृत वोटर हैं।
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अध्यक्ष व उपाध्यक्ष निर्वाचन: निकायों के सदस्यों के निर्वाचन के उपरांत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
👮 सुरक्षा एवं प्रशासनिक अमले की बड़े पैमाने पर तैनाती
शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं:
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चुनावी कार्मिक: पूरी चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए लगभग 1.15 लाख प्रशासनिक व सिविल कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
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सुरक्षा व्यवस्था: कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग के 98,790 जवानों की तैनाती की जाएगी।
🎙️ अधिसूचना से पूर्व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का बयान
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पूर्व राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने निकाय चुनावों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी:
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संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर: जूली ने कहा कि न्यायिक निर्देशों के बाद चुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ है और स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समय पर होना अनिवार्य है।
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आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी: उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए निकाली गई लॉटरी और आरक्षण प्रावधानों के निर्धारण पर सवाल उठाते हुए अपना पक्ष रखा।
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