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कमल का झंडा बचा रहा लोगों की जान, मुरैना में गर्ल्स स्कूल रोड बनी मौत का ट्रैप

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मुरैना: शहर में इन दिनों एक अजीबो-गरीब और चौंकाने वाला नजारा सामने आया है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुरैना की व्यस्त गर्ल्स स्कूल रोड के बीच बना गहरा गड्ढा अब सरकारी चेतावनी बोर्ड से नहीं, बल्कि राजनीतिक झंडों से पहचाना जा रहा है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग इसे ‘मौत का ट्रैप’ कहने लगे हैं. नगर निगम की लापरवाही से नाराज स्थानीय लोगों ने हादसों से बचाव के लिए खुद ही अनोखा कदम उठाया. गड्ढे के चारों ओर भाजपा के कमल के झंडे और लाल कपड़ा लगाकर संकेतक बना दिया, ताकि वाहन चालकों को समय रहते खतरे का एहसास हो सके. यह अनूठा इंतजाम अब शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

सड़क खोदकर गायब हुआ निगम का अमला

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले नगर निगम द्वारा सीवरेज और पानी की लाइन सुधारने के लिए गर्ल्स स्कूल की सड़क को खोदा गया था. काम आधे में छोड़कर निगम का अमला मौके से गायब हो गया. इसके बाद न तो गड्ढा भरा गया, न बैरिकेडिंग हुई और न ही कोई सूचना बोर्ड लगाया गया. नतीजा यह हुआ कि दिन-रात इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए यह सड़क खतरे का रास्ता बन गई.

गड्ढे के चारों ओर लगाया गया भाजपा का झंडा

स्थानीय लोगों के अनुसार, रोजाना यहां बाइक सवार फिसल रहे हैं, कारों के पहिए गड्ढे में धंस रहे हैं और कई लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं. सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्राओं, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है. इसके बावजूद नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई, मानो विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार हो. नगर निगम की इस लापरवाही से परेशान होकर स्थानीय नागरिकों ने खुद ही अनोखा कदम उठा लिया. हादसों से बचाव के लिए गड्ढे के चारों ओर भाजपा के कमल के झंडे लगा दिए गए, ताकि दूर से ही वाहन चालकों को खतरे का अंदाजा हो सके.

लोगों की सुरक्षा के लिए राजनीतिक झंडे तैनात

यह दृश्य अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है. लोग कह रहे हैं कि जहां सरकारी विभाग फेल हो गए, वहां झंडों ने जिम्मेदारी संभाल ली. इस अजीब इंतजाम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे राजनीतिक झंडे चेतावनी संकेतक का काम कर रहे हैं और नगर निगम की उदासीनता को उजागर कर रहे हैं. लोग तीखे सवाल उठा रहे हैं कि अगर नागरिक खुद सुरक्षा इंतजाम करने को मजबूर हों, तो जिम्मेदार विभाग आखिर किस काम के?

स्थानीय निवासी ने की स्थायी समाधान की मांग

हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल लोगों की जान बचाने में मदद कर रही है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. क्षेत्रवासियों की मांग है कि नगर निगम तुरंत गड्ढा भर कर सड़क को सुरक्षित बनाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन की नींद टूट सके. अब देखना यह है कि यह अजीबो-गरीब मामला कब तक यूं ही चलता रहेगा.

स्थानीय निवासी नरेश गुप्ता ने बताया कि “नगर निगम द्वारा 5–6 दिन पहले सीवरेज कार्य के लिए सड़क खोदी गई थी, लेकिन काम अधूरा छोड़कर लेबर चले गए. इसके बाद गड्ढे में चार पहिया वाहन, बाइक और स्कूटी फंसती रहीं. कई बार लोगों ने मिलकर वाहनों को बाहर निकाला. लगातार हो रहे हादसों से परेशान होकर स्थानीय नागरिकों ने गड्ढे के चारों ओर झंडे लगाकर संकेतक बना दिए, ताकि राहगीरों और वाहन चालकों को समय रहते खतरे का अंदाजा हो सके.”

नगर निगम आयुक्त सतेंद्र सिंह धाकरे ने बताया कि “मामले की शिकायत प्राप्त हो चुकी है. संबंधित गड्ढे को जल्द से जल्द बंद कराया जाएगा. साथ ही जांच कर यह देखा जाएगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई है और कर्मचारियों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.”

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