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बीजापुर में वन विभाग पर मनमाने तरीके से पेड़ कटाई का कांग्रेस ने लगाया आरोप, लोगों ने की डीएफओ को हटाने की मांग

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बीजापुर: बस्तर हमेशा से घने जंगलों के लिए जाना जाता है. लेकिन विकास के नाम पर पेड़ों की बलि भी उसी तेजी से बस्तर में ली जा रही है. ग्रामीणों और कांग्रेस का आरोप है कि, पेद्दाकोड़ेपाल और कावड़गांव क्षेत्र में वन विभाग के द्वारा बेवजह पेड़ों की कटाई की जा रही है. लगातार पेड़ों की कटाई किए जाने से स्थानीय लोगों, खासकर आदिवासी समुदाय में भारी गुस्सा है. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग टेढ़ा और मोटा पेड़ होने का हवाला देकर नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से पेड़ों की कटाई कर रहा है.

वन विभाग पर बेवजह पेड़ काटने का आरोप

स्थानीय लोगों और कांग्रेस का ये भी आरोप है कि इस कटाई में न केवल कीमती सागौन के पेड़ शामिल हैं, बल्कि आदिवासी समाज की आजीविका से सीधे जुड़े महुआ और तेंदूपत्ता जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों को भी अंधाधुंध काटा गया है. ग्रामीणों का कहना है कि महुआ और तेंदूपत्ता के पेड़ न केवल वन उपज हैं, बल्कि उनके जीवन, संस्कृति और आर्थिक आधार का अभिन्न हिस्सा हैं.

ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ेगा असर

स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि महुआ से जहां खाद्य सामग्री और पारंपरिक उपयोग जुड़ा है वहीं तेंदूपत्ता आदिवासी परिवारों की मौसमी आय का बड़ा साधन भी सालों से रहा है. इन पेड़ों की कटाई से सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने न तो ग्राम सभाओं से अनुमति ली और न ही स्थानीय लोगों की सहमति को हासिल करना उचित समझा.

पेड़ कटाई का विरोध

कटाई के विरोध में ग्रामीण लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही. ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने पेड़ कटाई का विरोध किया तो वन विभाग के अधिकारियों ने दबाव बनाने और डराने-धमकाने की कोशिश की. इस पूरे मामले में जिला वन अधिकारी डीएफओ पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि डीएफओ की दादागिरी के चलते निचले स्तर के अधिकारी भी नियमों की अनदेखी करते हुए कटाई को अंजाम दे रहे हैं.

कांग्रेस विधायक ने दिया समर्थन

मामला तूल पकड़ता देख क्षेत्र के विधायक विक्रम शाह मंडावी खुलकर ग्रामीणों के समर्थन में सामने आ गए हैं. विधायक मंडावी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बिना ग्राम सभा की सहमति के इस तरह की कटाई कानून और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है. विधायक ने डीएफओ को हटाने और पेद्दाकोड़ेपाल और कावड़गांव क्षेत्र में चल रही वन कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.

सरकार को यह समझना होगा कि जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यहां रहने वाले आदिवासी समुदायों की पहचान, संस्कृति और जीवन का आधार हैं. विकास और प्रबंधन के नाम पर जंगलों का दोहन किया जा रहा है, जिसका सीधा नुकसान गरीब और आदिवासी परिवारों को उठाना पड़ रहा है. यदि सरकार ने ग्रामीणों की आवाज को अनसुना किया और डीएफओ को नहीं हटाया तो वे ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे: विक्रम शाह मंडावी, विधायक, कांग्रेस

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस विधायक ने कहा कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन नियमों और अनुमतियों के आधार पर यह कटाई की जा रही है. जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक क्षेत्र में सभी प्रकार की पेड़ कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. इधर, ग्रामीणों ने भी साफ शब्दों में कहा है कि वे अपने जंगल, जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे. स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

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