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G Ram G का भी भरोसा नहीं, ये कभी भी हो सकता है बंद!” DMK ने केंद्र की डिजिटल नीतियों पर साधा निशाना; शुरू हुआ नया सियासी वार

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तमिलनाडु की सत्ताधारी DMK ने शनिवार को केंद्र सरकार पर नए VB-G RAM G बिल को लेकर हमला बोला और कहा कि सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाना ही मुद्दा नहीं है. DMK ने दावा किया कि नए बिल में कुल 125 दिनों के काम की कोई गारंटी नहीं है और इसमें ऐसे सभी फीचर्स हैं जो किसी भी समय इस योजना को रोकने में मदद कर सकते हैं.

DMK के मुखपत्र ‘मुरासोली’ ने कहा कि रोजगार गारंटी योजना से गांधी का नाम हटाना ही अकेला मुद्दा नहीं था, बल्कि उस योजना का मूल उद्देश्य ही खत्म किया गया है और यही मुख्य मुद्दा है. मुरासोली ने 20 दिसंबर के अपने संपादकीय में कहा गांधी का नाम हटाने के पूरे मामले में दूसरे मुद्दे दब गए हैं. गांधी जी का नाम हटाने से उनकी छवि पर किसी भी तरह से कोई असर नहीं पड़ने वाला था और उनका नाम हटाने से लोग उन्हें और ज़्यादा याद कर रहे हैं और उनके बारे में बात कर रहे हैं.

DMK ने बताए बिल के विरोध के दस कारण

DMK पार्टी ने G राम G ग्रामीण रोजगार गारंटी बिल का विरोध करने के 10 कारण बताए और उस नाम को यह कहकर खारिज कर दिया कि इसका उच्चारण करना भी बहुत मुश्किल है. बता दें कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) या VB-G RAM G बिल, जो ग्रामीण भारत के लिए 125 दिनों की गारंटीड नौकरियों का आश्वासन देता है, संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जा चुका है.

60:40 का कॉस्ट-शेयरिंग रेशियो राज्य के फंड की लूट

नई योजना में फंड का शेयरिंग रेशो 60:40 रखा गया है, जिसमें 40 फीसद फंड राज्य सरकारों को देना होगा. DMK ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 का कॉस्ट-शेयरिंग रेशियो राज्य के फंड की लूट है. द्रविड़ तमिल दैनिक में कहा गया है कि वे 125 दिनों तक काम देने का दावा करते हैं. DMK ने योजना के उस फीचर की बात की है, जिसमें बुवाई और कटाई की सीजन में काम नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान VB-G RAM G एक्ट के तहत काम नहीं किए जाएंगे और यह फीचर उन लोगों को प्रभावित करेगा जो खेती के काम में शामिल नहीं हैं. साथ ही लाभार्थियों को केंद्र के मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) का इस्तेमाल करके लिस्टेड किया जाएगा और यह सीधे तमिलनाडु जैसे राज्यों को प्रभावित करेगा जो गरीबी खत्म करने के लिए लड़ रहे हैं.

योजना को कभी रोका जा सकता है

DMK ने खुलासा किया कि नई योजना को कुछ डेटा का हवाला देकर, यह दावा करके रोका जा सकता है कि गरीबी खत्म हो गई है. पिछले कानून के मुताबिक नौकरी पाना लोगों का अधिकार था और अब नए बिल के मुताबिक अगर नौकरी उपलब्ध होगी तो ही दी जाएगी.

यह नई पहल संघवाद, राज्य की स्वायत्तता के खिलाफ है क्योंकि एक प्रावधान केंद्र को हर राज्य के लिए नौकरियों का फैसला करने का अधिकार देता है. ऐसा क्लॉज गैर-बीजेपी शासित राज्यों को धोखा देने का रास्ता खोलेगा.

DMK ने बताया कि मनरेगा से अलग, अगर काम नहीं दिया जा सका तो इसमें मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है. इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि 125 दिनों तक काम दिया जाएगा. इस नए बिल में किसी भी समय योजना को रोकने की सुविधा देने वाले सभी फीचर्स हैं.

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