झारखंड में 42.18 प्रतिशत नल जल योजना का काम पेंडिंग, पैसे नहीं मिलने से संवेदक परेशान, मंत्री बोले-केंद्र जिम्मेवार
रांचीः झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने की कोशिश पर ग्रहण लगा हुआ है. नल जल योजना का हाल बेहाल है. केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तालमेल के अभाव में योजनाएं अधर में लटक गईं हैं. राज्य सरकार ने इसके लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार को जिम्मेवार ठहराया है. विभागीय मंत्री ने जो डाटा साझा किया है, वो चौंकाने वाले हैं. दावा है कि केंद्रांश नहीं मिलने से योजनाएं प्रभावित हुई हैं. इसकी वजह से जरूरतमंदों तक नल से जल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है.
केंद्रांश नहीं मिलने से नल जल योजना प्रभावित
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद का दावा है कि केंद्र सरकार की बेरुखी के कारण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. इसकी वजह से बड़ी संख्या में जरूरतमंदों तक नल से जल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने बताया कि झारखंड में नल जल की 97,535 योजनाएं संचालित हैं. इनमें से 56,386 योजनाओं का काम पूरा हो चुका है. शेष योजनाएं निर्माणाधीन हैं. इस योजना में केंद्रांश 50 प्रतिशत और राज्यांश 50 प्रतिशत है. केंद्रांश के रूप में 24,665 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं. इसकी तुलना में राज्य सरकार ने 6,874 करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने महज 5,987 करोड़ रुपये दिए हैं.
वर्तमान वित्तीय वर्ष में केंद्रांश शून्य
विभागीय मंत्री का दावा है कि केंद्र से पिछले वित्तीय वर्ष में 2,114 करोड़ रुपये मिलना था. इसकी तुलना में सिर्फ 70 करोड़ रुपये मिले हैं. जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने जा रहा है. आज भी वर्तमान वर्ष का एक पैसा नहीं मिला है. जबकि करीब 6,500 करोड़ आज भी केंद्रांश के रुप में लेना है. इसकी वजह से योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं. इसको लेकर राज्य सरकार गंभीर है. विभागीय मंत्री का कहना है कि राज्य सरकार ने पहल कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपने राज्यांश से 1,231 करोड़ जारी कर योजनाओं को चालू कराने की दिशा में पहल की. इस वित्तीय वर्ष में भी राज्यांश की राशि से योजनाओं को पूर्ण कराने की कोशिश की जा रही है.
बकाया नहीं मिलने से संवेदक हैं परेशान
इधर, काम करने के बावजूद संवेदकों का भुगतान नहीं हो रहा है. वहीं ज्यादातर विधायकों का आरोप है कि योजनाओं में धांधली हुई है. हालांकि विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद का दो टूक कहना है कि अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.बता दें कि 29 अक्टूबर को जल जीवन मिशन के संवेदकों ने लोकभवन के सामने एक दिवसीय धरना दिया था. संवेदकों ने जल बंद आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी. दावा किया था कि काम करने के बावजूद पिछले 20 माह से राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है. मार्च 2024 से भुगतान बंद है. इसकी वजह से तमाम छोटे संवेदक दिवालिया होने की कगार पर हैं.दावा किया गया था कि राज्य के छोटे ठेकेदार अपना खर्चे से गांवों में जलापूर्ति को चालू रखे हुए हैं. ऐसे में छोटे ठेकेदारों का भुगतान पहले होना चाहिए. आरोप लगाया गया था कि मिशन के तहत चल रहे बहु ग्राम और एकल ग्राम योजना के नाम पर भी भेदभाव किया जा रहा है. राज्य सरकार से भुगतान का टाइमलाइन जारी करने की मांग की गई थी.
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